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नेक काम:  शिमला में वस्त्र बैंक की शुरुआत, जरूरमंदों को बांटें जाएंगे कपड़े

सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट ने की पहल
शिमला। सामाजिक क्षेत्र में जनता की भलाई के लिए काम कर रहे सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट की ओर से एक बार फिर वस्त्र बैंक की शुरुआत की गई। शिमला जिले के संजौली बस स्टैंड, न्यू शिमला नजदीक अक्षरधाम मंदिर, रिज़, शिमला एवं टुटु चौक, बस स्टैंड पर ट्रस्ट के कार्यकताओं ने वस्त्र एकत्र किए। सर्दियों के मौसम में हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड की वजह से खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह परेशानी गरीब तबके के लोगों के लिए और भी ज्यादा होती है, क्योंकि उनके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं होते। ऐसे में सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट की ओर से इन लोगों को कपड़े बांटे जाएंगे।
हिमाचल मौसम अपडेट: ये 3 दिन 4 जिलों में येलो अलर्ट-जानिए क्यों
ट्रस्ट इसके लिए यूनिवर्सिटी-कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ प्रदेश भर के लोगों का सहयोग लेता है।  ट्रस्ट के सचिव सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि ट्रस्ट प्रत्येक वर्ष विभिन्न कार्यक्रम समाज एवं राष्ट्र हित में करवाता आ रहा है और हर वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी वस्त्र बैंक कार्यक्रम में लोगों ने भरपूर सहयोग दिया, ताकि यह वस्त्र किसी जरूरतमंद व्यक्ति के काम आ सकें।
ट्रस्ट के सचिव सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि गरीब और जरूरतमंदों की मदद करना एक मानव धर्म है, जिसे ट्रस्ट निभाने की पूरी कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट हर साल जरूरतमंदों की मदद के लिए शिमला में वस्त्र बैंक अभियान चलाता है। इस वर्ष भी सर्दियों को देखते हुए ट्रस्ट लोगों से पुराने कपड़े लेकर गरीबों को देने का अभियान शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि संपन्न समाज के लोग कपड़े दान कर बड़ा उपकार का काम कर सकते हैं। सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में सुधार के लिए भी काम कर रहा है। गरीब तबके से जुड़े लोगों को पढ़ाई में भी समर्थन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट ने जरूरतमंद तबके तक पहुंचकर उनकी मदद करने का काम किया। प्रोफेसर सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट से जुड़ा हर कार्यकर्ता नि:स्वार्थ भाव से अपने दायित्व का निर्वहन कर रहा है।
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ड्रग फ्री हिमाचल ऐप पर मिली सूचना, पुलिस ने धरा आरोपी

शिमला में चिट्टा किया बरामद
शिमला। नशा तस्करों पर नकेल कसने के लिए हिमाचल पुलिस की कार्रवाई जारी है। वहीं, नशे के कारोबार को लेकर किसी भी प्रकार की जानकारी को ड्रग फ्री हिमाचल ऐप शुरू की है। इस ऐप में जानकारी सांझी की जा सकती है। इसकी ही प्रकार की एक जानकारी के आधार पर शिमला पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चिट्टे के साथ एक को दबोचा है।
हिमाचल मौसम अपडेट: ये 3 दिन 4 जिलों में येलो अलर्ट-जानिए क्यों
बता दें कि खलीनी में नशे के कारोबार से जुड़ी एक शिकायत ड्रग फ्री हिमाचल ऐप पर मिली। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खलीनी निवासी एक युवक को 2.85 ग्राम चिट्टे के साथ दबोच लिया। न्यू शिमला थाना में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगामी कार्रवाई जारी है।
क्या है ड्रग फ्री हिमाचल ऐप
हिमाचल पुलिस ने ड्रग फ्री हिमाचल नामक मोबाइल ऐप शुरू की है। इसमें सूचना देने वाले की पहचान पुलिस भी नहीं कर सकती है। ऐसे में हिमाचल में लोग इस ऐप पर नशे के बारे में सूचना देने लगे हैं। इस साल काफी शिकायतें नशे से संबंधित पुलिस को मिल चुकी हैं, जिन पर कार्रवाई भी हुई है।
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हिमाचल मौसम अपडेट: ये 3 दिन 4 जिलों में येलो अलर्ट-जानिए क्यों

8 दिसंबर तक शुष्क रहेगा मौसम
शिमला। हिमाचल में पिछले 24 घंटे में मौसम शुष्क रहा है। न्यूनतम और अधिकतम तापमान में कोई बदलाव नहीं हुआ है औसत न्यूनतम औऱ अधिकतम  तापमान सामान्य रहे हैं।  आज सबसे कम न्यूनतम तापमान केलांग का -4.8 डिग्री और पिछले कल अधिकतम तापमान ऊना का 26.8 डिग्री सेल्सियस रहा है।
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हिमाचल में 8 दिसंबर तक मौसम शुष्क बने रहने का अनुमान है। 8 दिसंबर को उच्च पर्वतीय क्षेत्रों लाहौल स्पीति, किन्नौर, चंबा और कुल्लू व मंडी के ऊपरी क्षेत्रों में एक दो स्थानों पर बारिश और बर्फबारी की संभावना है।
वहीं, तीन दिन चार में येलो अलर्ट जारी हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 4, 5 और 6 दिसंबर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। सुबह से समय बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा. मंडी जिलों के एक दो स्थानों पर मध्यम से घना कोहरा रहने की संभावना जताई है। इसलिए वाहन चालक सुबह के समय सावधानी से आवाजाही करें।
हिमाचल में दिसंबर माह अब तक सूखा ही गुजरा है। बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है। सभी जिलों में सामान्य बारिश की बात करें तो जिलों में सामान्य बारिश से 100 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं, एक अक्टूबर 2022 से 4 दिसंबर तक बारिश की बात करें तो सामान्य से 24 फीसदी अधिक बारिश हुई है। बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, सिरमौर, शिमला और सोलन में अच्छी बारिश हुई है। हमीरपुर, किन्नौर, लाहौल स्पीति और ऊना में सामान्य से कम फीसदी बारिश हुई है।
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हिमाचल में बर्फबारी: ऩवंबर ने कर दिया कमाल, अब दिसंबर की बारी

बर्फबारी से पर्यटन कारोबार को मिली संजीवनी
शिमला। हिमाचल में नवंबर माह में हुई बर्फबारी पर्यटन कारोबार के लिए संजीवनी दिख रही है। दिसंबर के पहले हफ्ते में होटलों में ऑक्यूपेंसी 70 फीसदी से अधिक है। अब क्रिसमस और न्यू ईयर पर नजरें हैं। क्रिसमस और न्यू ईयर के लिए होटलों में अभी से बुकिंग शुरू हो गई है। अब तक 25 फीसदी बुकिंग क्रिसमस और न्यू ईयर पर हुई है। वहीं, आज वीकेंड पर शिमला में पर्यटकों की काफी भीड़ देखी गई। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या से भी दो चार होना पड़ा।
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बता दें कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटक कारोबार पटरी पर लौट आया है। नवंबर माह में पहाड़ों पर हुई बर्फ़बारी के बाद से ही पर्यटकों की आमद बढ़ गई है। दिसंबर माह के पहले वीकेंड पर पहाड़ों की रानी शिमला में पर्यटकों से गुलजार हो गई है। पड़ोसी राज्य चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से काफी तादाद में पर्यटक शिमला पहुंचे हैं, जिसके चलते शिमला में होटलों में ऑक्यूपेंसी भी 70 फीसदी से ज्यादा हो गई है।
नवंबर माह तक एक करोड़ 40 लाख पर्यटक पहुंचे
राजधानी शिमला के रिज और मालरोड पर पर्यटकों की आमद बढ़ने से पर्यटन कारोबारी भी काफी खुश हैं और उन्हें इस बार अच्छा पर्यटन कारोबार होने की उम्मीद है। कोरोना के चलते दो साल कारोबारियों को काफी नुकसान झेलना पड़ा था, लेकिन इस साल नवंबर माह तक एक करोड़ 40 लाख पर्यटक हिमाचल पहुंच चुके हैं और दिसंबर माह काफी पर्यटकों के आने की उम्मीद है। खासकर क्रिसमस और नए साल के जश्न के लिए काफी तादात में आ सकते हैं। अभी से ही पर्यटक क्रिसमस को लेकर एडवांस बुकिंग करवा रहे हैं।
एक करोड़ 70 लाख पहुंच सकता है आंकड़ा
निजी होटल और पर्यटन निगम के होटल भी तैयारियो में जुटे हैं। पर्यटन निगम के निदेशक अमित कश्यप ने कहा कि इस साल काफी तादाद में पर्यटक हिमाचल आ रहे हैं और नवंबर माह तक एक करोड़ 40 लाख पर्यटक हिमाचल आ चुके हैं। दिसंबर माह में भी बर्फबारी देखने के लिए काफी संख्या में पर्यटक आ सकते हैं। एक करोड़ 70 लाख का आंकड़ा पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि क्रिसमस और नए साल को लेकर लेटर निगम के होटलों में तैयारियां की जा रही हैं और पर्यटको के मनोरंजन की व्यवस्था की जा रही है।
पर्यटन कारोबारियों को काफी राहत
वहीं, पर्यटकों की आमद बढ़ने से पर्यटन कारोबारी भी काफी खुश नजर आ रहे हैं। टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेक होल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र सेठ का कहना है कि इस साल पर्यटक काफी तादाद में आ रही हैं और यदि क्रिसमस नए साल पर बर्फबारी होती है तो पर्यटन कारोबारियों को काफी राहत मिलेगी। बर्फबारी देखने के लिए बाहरी राज्यों से काफी तादाद में लोग शिमला सहित प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि क्रिसमस और नए साल को लेकर अभी 25 फीसदी ही बुकिंग हुई है।
पहाड़ों की रानी शिमला में वीकेंड पर बाहरी राज्यों से काफी तादाद में पर्यटक शिमला पहुंचे हैं। रविवार को भी सुबह से ही पर्यटकों की आमद शुरू हो गई और शहर में जाम जैसी समस्या से भी लोगों को जूझना पड़ा। शिमला के विक्ट्री टनल से टूटीकंडी तक जाम लगा रहा और वाहन रेंगते हुए नजर आए। इससे 20 मिनट के सफर में एक घंटा का समय लगा।

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शिमला में डॉग एडॉप्शन योजना पर उठे सवाल, दहशत बरकरार

कुत्तों से परेशान जनता, नगर निगम निजात दिलाने में विफल
शिमला।  हिमाचल की राजधानी शिमला में बंदरों और कुत्तों की समस्या जस की तस बनी हुई है। शहर के हर वार्ड में समस्या है। लोग इससे काफी परेशान हैं। आवारा कुत्तों की समस्या लगातार बढ़ने से दहशत भी बढ़ गई है। रात के समय ये मामले बढ़ जाते हैं। हालांकि, कुत्तों की समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर निगम ने डॉग एडॉप्शन योजना शुरू की है, जिसके तहत निगम आवारा कुत्तों को गोद लेने पर पार्किंग और गारबेज फीस की फ्री सेवा देता है। अब तक इस योजना के तहत करीब 150 लोग फायदा उठा चुके हैं। फिर भी समस्या जैसे पहले थी वैसे ही है। ऐसे में डॉग एडॉप्शन योजना पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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कई बार प्रशासन के समक्ष जनता गुहार लगा चुकी है, लेकिन कुत्तों के आतंक से कोई निजात नहीं मिल पाई है। राजधानी पर्यटन की दृष्टि से एक अलग महत्व रखती है, लेकिन शहर के ऐतिहासिक क्षेत्रों में बेसहारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राजधानी के जिला अस्पताल दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल की अगर बात करें तो अकेले इस अस्पताल में पिछले 4 महीनों में 439 कुत्तों के काटने के मामले आए हैं।
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अस्पताल के एमएस (MS) डॉ. लोकेन्द्र शर्मा ने बताया कि जानवरों के काटने में कोई कमी नहीं आई है, जो आंकड़ा पुराना है, उससे अधिक मामले आ रहे हैं। इसके अलावा नगर निगम की डॉग एडॉप्शन योजना के बाद भी इसमें कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने बताया अकेले इसी अस्पताल में हर माह सैकड़ों मरीज जानवरों के काटने के पहुंचते हैं, जिन्हें एंटी रेबीज का टीका लगाकर वापस घर भेजा जाता है। इसके अलावा अस्पताल में रोजाना आठ से दस मामले आते हैं, जिनका मुफ्त में उपचार किया जाता है।
बंदरों और कुत्तों का आतंक शहर में इस कद्र बढ़ गया है कि माल और रिज में कुछ भी खाने पीने की चीज़ों को पर्यटकों और स्थानीय लोगों से छीन कर आसानी से भाग जाते हैं। नगर निगम शिमला ने आवारा कुत्तों से निजात पाने के लिए शिमला में डॉग एडॉप्शन योजना शुरू की है, जिसके तहत निगम आवारा कुत्तों को गोद लेने पर पार्किंग और गारबेज फीस की फ्री सेवा देता है। अब तक इस योजना के तहत करीब 150 लोग फायदा उठा चुके हैं, लेकिन शहर में समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है।
शिमला नगर निगम की  डॉग एडॉप्शन योजना के बाद भी शहर के सभी वार्डों में नवजात कुतों से लेकर बड़े आवारा कुत्तों की संख्या पर कोई लगाम नहीं लग पाई है, जिससे अब निगम की डॉग एडॉप्शन योजना पर भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या निगम ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए यह योजना शुरू की है या फिर वाक्य ही शहर में आवारा कुत्तों की बढती संख्या पर लगाम लगी है, लेकिन शहर में नवजात कुत्तों और आवारा कुत्तों को देखते हुए प्रशासन के दावे खोखले साबित होते दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में ऐसी कोई भी जगह नहीं है, जहां पर कुत्ते नहीं हैं। सुबह के समय बच्चों को अकेले स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं है। बच्चों पर कुत्ते हमला कर देते हैं। इन कुत्तों के लिए कोई न कोई नीति बनाई जानी चाहिए, ताकि लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। कुत्ते के काटने का सबसे ज्यादा खतरा महिलाओं और बच्चों को होता है ये ज्यादातर बच्चों पर ही हमला करते हैं। इसके बावजूद प्रशासन इस समस्या के प्रति गंभीर नहीं है।

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शिमला: ERP सिस्टम को लेकर SFI का हल्ला, रैली निकाल नारेबाजी

kue-बिना इंफास्ट्रक्चर के किया लागू

शिमला। एचपीयू में ईआरपी (ERP) सिस्टम पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। 80 फीसदी छात्रों के फेल होने के बाद छात्र सड़कों पर हैं। इसी कड़ी में आज एसएफआई (SFI) ने शिमला के पंचायत भवन से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक आक्रोश रैली निकाली और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

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एसएफआई के जिला सचिव बंटी ठाकुर ने बताया कि रूसा के बाद अब ईआरपी सिस्टम से 80 प्रतिशत छात्र फेल हो गए हैं। रूसा के लागू होने से 90 फीसदी छात्रों को इसका नुकसान भुगतना पड़ा था। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ईआरपी सिस्टम पर 8 करोड़ से ज्यादा खर्च किया है, लेकिन नतीजे शून्य हैं। इस प्रणाली में ऑनलाइन पीडीएफ ब्लर हो सकती हैं। अध्यापकों के पास इसके लिए पर्याप्त डाटा है या नहीं बिना इंफास्ट्रक्चर के यह सिस्टम लागू हुआ है। एसएफआई दो दिन का अधिवेशन करने जा रही है, उससे पहले रैली व प्रदर्शन कर इस प्रणाली को वापस लेने की मांग कर रही है।

 

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एचपीयू में डिजिटल अपराधों और फॉरेंसिक पर राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू

राज्यपाल राजेंद्र विश्व नाथ आर्लेकर ने किया शुभारंभ
शिमला। डिजिटल अपराधों और फॉरेंसिक में उभरती प्रवृत्तियों को लेकर शिमला विश्वविद्यालय (एचपीयू) में फॉरेंसिक विभाग और क्षेत्रीय फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी नॉर्थन रेंज धर्मशाला द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने किया। सम्मलेन का मकसद डिजिटल अपराधों और फॉरेंसिक साइंस के माध्यम से उनके बचाव की जानकारी सांझा करना है।
HPU पहुंचे राज्यपाल को छात्र संगठनों ने सौंपा ज्ञापन, उठाई ये मांगें
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि आज का युग डिजिटल युग है। हर व्यक्ति किसी न किसी माध्यम से इससे जुड़ा हुआ है। इसलिए लोगों को इसके सही प्रयोगों की जानकारी होना आवश्यक है। सम्मेलन के माध्यम से विशेषज्ञ डिजिटल और फॉरेंसिक रिसर्च की जानकारी छात्रों से सांझा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस हिमाचल प्रदेश के बॉर्डर एरिया जिनकी सीमाएं दूसरे देशों से लगती हैं, वहां पर सर्विलांस के रूप में इस्तेमाल हो सकती है। सम्मेलन से जो रिपोर्ट बनेगी उसे भारत सरकार से भी सांझा किया जा सकता है, ताकि भविष्य के लिए रोडमैप बनाया जा सके। सम्मेलन आज और कल दो दिन तक चलेगा, जिसमें कई डिजिटल और फॉरेंसिक साइंस विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।
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HPU पहुंचे राज्यपाल को छात्र संगठनों ने सौंपा ज्ञापन, उठाई ये मांगें

हॉस्टल की सुविधा सहित कई मांगें उठाई
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) की ओर से घोषित किए गए पहले और दूसरे साल के रिजल्ट में करीब 80 फीसदी छात्र परीक्षा पास नहीं कर सके हैं। इसके बाद एचपीयू में माहौल गर्म है। इसी बीच छात्र संगठन एनएसयूआई और एसएफआई ने एक कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय (HPU) पहुंचे राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को ज्ञापन सौंपा और छात्रों को आ रही दिक्क़तों के समाधान की मांग उठाई।
कांगड़ा: हवाई मार्ग से महाराष्ट्र ले जाया गया डॉक्टर का शव, पुलिस खाली हाथ
छात्र संगठनों का कहना है कि विवि ने ईआरपी सिस्टम से पेपर चेक किए गए, जिससे 80 प्रतिशत छात्र फेल हो गए। इसमें खामियां हैं। रिचेकिंग के बाद जो पास होते हैं, उनकी फीस को रिफंड की जानी चाहिए। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्याल (HPU) में 6 से 7 हजार बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन केवल बारह सौ के करीब के लिए ही हॉस्टल की सुविधा है।
नेता विश्वविद्यालय (HPU) में पट्टिका लगाकर चले जाते हैं, लेकिन ये समस्याएं समाप्त नहीं हो रही हैं। उनका कहना है कि छात्र संघ के चुनाव बहाल किए जाने चाहिए। छात्रों ने आरोप लगाया कि अध्यापक राजनीतिक गतिविधियों में पढ़ाई से ज्यादा शामिल रहते हैं, जिससे विश्व विद्यालय में पढ़ाई का स्तर गिर रहा है।
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शिमला में 40 साल बाद फिर सुनाई देगी कॉल बेल, पढ़ें पूरी खबर

150 साल पहले इंग्लैंड से लाई थी क्राइस्ट चर्च शिमला

शिमला। ऐतिहासिक चर्च शिमला की कॉल बेल करीब 40 साल बाद एक बार फिर से लोगों को सुनाई देगी। बहुत से लोग शायद कॉल बेल को भूल चुके होंगे और इसकी ध्वनि से भी वाफिक नहीं होंगे।

आपको बता दें कि क्राइस्ट चर्च को जहां शिमला की पहचान माना जाता है, वहीं इसमें प्रार्थना के लिए 150 साल पहले इंग्लैंड से लाई “कॉल बेल” का भी अपना ही महत्व है। कॉल बेल को प्रार्थना से पहले बजाया जाता है। लगभग 40 साल से यह बेल खराब पड़ी थी, जिसकी रिपेयर अब पूरी हो चुकी है। 25 दिसंबर को क्रिसमस और 31 दिसंबर न्यू ईयर के मौके पर यह कॉल बेल शिमला के लोगों को फिर से सुनाई देगी।

SBI में इन पदों के लिए निकली भर्ती, जल्द करें ऑनलाइन आवेदन

क्या है कॉल बेल
कॉल बेल कोई साधारण घंटी नहीं है। यह मेटल से बने छह बड़े पाइप के हिस्से से बनी एक घंटी है। क्राइस्ट चर्च शिमला के पादरी सोहन लाल ने बताया कि घंटी के बजते ही इन पाइप पर संगीत के सात सुर की ध्वनि आती है। इन पाइप पर हथौड़े से आवाज होती है, जिसे रस्सी खींचकर बजाया जाता है। यह रस्सी मशीन से नहीं खींची जाती है, बल्कि हाथ से खींची जाती है। हर रविवार सुबह 11 बजे होने वाली प्रार्थना से पांच मिनट पहले यह बेल बजाई जाती है।

कांगड़ा जिला में 13 केंद्रों पर होगी वोटों की गिनती, 209 टेबल लगेंगे

उन्होंने बताया कि ब्रिटिश काल के समय अंग्रेजों के आवास=शिमला शहर में अलग अलग स्थानों पर होते थे। बेल के माध्यम से सूचित किया जाता था कि प्रार्थना शुरू होने वाली है। उस समय इसकी इसकी आवाज तारादेवी तक सुनाई देती थी। क्योंकि ब्रिटिश काल में मोबाइल फोन नहीं थे, इसलिए किसी दुखद घटना और आपातकाल की सूचना देने के लिए भी कॉल बेल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन उसकी ध्वनि अलग होती थी। 40 साल एक बार फिर से क्रिसमस और न्यू ईयर के मौके पर रात 12 बजे इस बेल को बजाकर जश्न मनाया जाएगा।

हिमाचल विस चुनाव: मतगणना से 3 दिन पहले तक नियुक्त कर सकते हैं एजेंट

गौरतलब है कि 9 सितंबर 1844 में इस चर्च की नींव कोलकाता के बिशप डेनियल विल्सन ने रखी थी। 1857 में इसका काम पूरा हो गया। स्थापना के 25 साल बाद इंग्लैंड से इस बेल को शिमला लाया गया था। 1982 में यह बेल खराब हो गई थी, जिसे 40 साल बाद अब दोबारा ठीक करवाया गया।

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शिमला: मतगणना को 89 टेबल होंगे स्थापित, डाक मतपत्रों के लिए दो-दो अलग 

350 कर्मियों के लिए प्रथम पूर्वाभ्यास 03 दिसम्बर को
शिमला। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीसी शिमला आदित्य नेगी की अध्यक्षता में आज विधानसभा चुनाव 2022 के दृष्टिगत जिला शिमला के समस्त आठ विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना प्रक्रिया के लिए तैनात मतगणना सुपरवाइजर, मतगणना सहायक तथा माईक्रो ऑबजर्वर की  प्रथम रेंडमाइजेशन की गई। इस अवसर पर जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतगणना कर्मियों की रेंडमाइजेशन चुनावी प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से मतगणना करवाने की एक अहम कड़ी है जो कि पूर्ण रूप से कम्पयुट्रीकृत है।
कांगड़ा जिला में 13 केंद्रों पर होगी वोटों की गिनती, 209 टेबल लगेंगे

 

उन्होंने कहा कि जिला शिमला के सभी आठ विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना प्रक्रिया 08 दिसम्बर, 2022 को प्रातः 8 बजे से आरंभ की जाएगी जिसे निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण तरीके से पूर्ण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मतगणना प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए विभिन्न टीमें गठित की गई है और उन्हें अलग-अलग दायित्व सौंपे गए है।
शिमला जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना के लिए 89 टेबल स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त डाक मतपत्रों की गणना के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में दो-दो टेबल अतिरिक्त स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मतगणना के लिए तैनात लगभग 350 कर्मियों के लिए प्रथम पूर्वाभ्यास 03 दिसम्बर को तथा द्वितीय पूर्वाभ्यास 06 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, जिसमें मतगणना से जुड़ी सम्पूर्ण प्रक्रिया का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि समस्त टीमें अपने-अपने कार्यो व दायित्वों का जिम्मेदारी के साथ निर्वहन कर सके।
उन्होंने कहा कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्ट्रांग रूम के नजदीक ही मतगणना हॉल स्थापित किए गए हैं, ताकि मतगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की दिक्कत न आए। उन्होंने कहा कि अनाधिकृत लोगों को मतगणना हॉल में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी तथा मतगणना हॉल में मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
उन्होंने कहा कि मतगणना हॉल के नजदीक मीडिया सेंटर भी स्थापित किया जाएगा ताकि प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से आम जनमानस तक हर राउंड की मतगणना की जानकारी त्वरित पहुंच सके। प्रथम रेंडमाइजेशन प्रक्रिया के दौरान एडीएम कानून एवं व्यवस्था राहुल चौहान, एडीएम प्रोटोकॉल सचिन कंवल, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी पंकज गुप्ता, तहसीलदार निर्वाचन राजेन्द्र शर्मा, नायव तहसीलदार निर्वाचन रत्नजीत सिंह  एवं लोकेन्द्र सिंह दुगलेट उपस्थित रहे ।