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IPL सीजन-17 : तीन मई को धर्मशाला पहुंचेंगी पंजाब और चेन्नई सुपर किंग्स की टीम

पांच मई को दोपहर बादा होगा मुकाबला

धर्मशाला। कांगड़ा जिला के धर्मशाला स्थित एचपीसीए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सीजन-17 के मुकाबले मई में होने वाले हैं।

5 मई को चेन्नई के साथ होने वाले मैच के लिए पंजाब की टीम 3 मई को धर्मशाला पहुंच जाएगी।

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इसकी साथ चेन्नई सुपर किंग्स की टीम भी 3 मई को ही धर्मशाला पहुंचेगी। इससे पहले दोनों टीमों के बीच चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में आईपीएल का 41वां मैच खेला जाएगा।

मुकाबलों के लिए पंजाब किंग्स की टीम धर्मशाला में 8 दिन रुकेगी। चार मई को सुबह और शाम के सत्र में अभ्यास करने के बाद दोनों टीम के बीच पांच मई को दोपहर साढ़े तीन बजे आईपीएल का मुकाबला खेला जाएगा।

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वहीं, पंजाब टीम का धर्मशाला में दूसरा मुकाबला नौ मई को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के साथ होगा। इसके लिए पंजाब की टीम धर्मशाला में रहकर तीन दिन अभ्यास करेगी।

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम चार मई को अपने होम ग्राउंड में गुजरात के साथ मैच खेलने के बाद धर्मशाला आएगी।

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एचपीसीए के सचिव अवनीश परमार ने बताया कि धर्मशाला में होने वाले आईपीएल (IPL) मैचों के लिए पंजाब की टीम दो या तीन मई को पहुंचेगी। पंजाब की टीम धर्मशाला में 5 और 9 मई को अपने मैच खेलने के बाद 10 मई को यहां से रवाना होगी।

 

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चैत्र नवरात्र : पांचवें दिन करें मां स्कंदमाता की पूजा, जानें विधि, बीज मंत्र और आरती

चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप यानी मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण देवी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।

सिंह पर सवार स्कन्दमाता देवी की चार भुजाएं हैं, जिसमें देवी अपनी ऊपर वाली दांयी भुजा में बाल कार्तिकेय को गोद में उठाए उठाए हुए हैं और नीचे वाली दांयी भुजा में कमल पुष्प लिए हुए हैं।

ऊपर वाली बाईं भुजा से इन्होने जगत तारण वरद मुद्रा बना रखी है व नीचे वाली बाईं भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और ये कमल के आसान पर विराजमान रहती हैं इसलिए इन्हें पद्मासन देवी भी कहा जाता है।

सच्चे मन से पूजा करने पर स्कंदमाता सभी भक्तों की इच्छाओं को पूरी करती हैं और कष्टों को दूर करती हैं। संतान प्राप्ति के लिए माता की आराधना करना उत्तम माना गया है।

माता रानी की पूजा के समय लाल कपड़े में सुहाग का सामान, लाल फूल, पीले चावल और एक नारियल को बांधकर माता की गोद भर दें। ऐसा करने से जल्द ही घर में किलकारियां गूंजने लगती हैं।

स्कंदमाता मोक्ष का मार्ग दिखाती हैं और इनकी पूजा करने से ज्ञान की भी प्राप्ति होती है। माता का यह स्वरूप ममता की मूर्ति, प्रेम और वात्सल्य का साक्षात प्रतीक हैं।

मां स्कंदमाता पूजन विधि
  • प्रात: काल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद मां का पूजन आरंभ करें एवं मां की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • मां के श्रृंगार के लिए शुभ रंगों का इस्तेमाल करना श्रेष्ठ माना गया है।
  • स्कंदमाता और भगवान कार्तिकेय की पूजा विनम्रता के साथ करनी चाहिए।
  • पूजा में कुमकुम, अक्षत, पुष्प, फल आदि से पूजा करें।
  • चंदन लगाएं, माता के सामने घी का दीपक जलाएं।
  • इसके बाद फूल चढ़ाएं व भोग लगाएं।
  • मां की आरती उतारें तथा इस मंत्र का जाप करें
मां स्कंदमाता के मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां स्कंदमाता का प्रिय रंग और भोग

भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है। आरती के बाद 5 कन्याओं को केले का प्रसाद बांटें। मान्यता है इससे देवी स्कंदमाता बहुत प्रसन्न होती है और संतान पर आने वाले सभी संकटों का नाश करती है।

मां स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो स्कंदमाता,
पांचवां नाम तुम्हारा आता।
सब के मन की जानन हारी,
जग जननी सब की महतारी। जय तेरी हो स्कंदमाता
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं,
हर दम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।
कई नामों से तुझे पुकारा,
मुझे एक है तेरा सहारा। जय तेरी हो स्कंदमाता
कहीं पहाड़ों पर है डेरा,
कई शहरो में तेरा बसेरा।
हर मंदिर में तेरे नजारे,
गुण गाए तेरे भक्त प्यारे। जय तेरी हो स्कंदमाता
भक्ति अपनी मुझे दिला दो,
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।
इंद्र आदि देवता मिल सारे,
करे पुकार तुम्हारे द्वारे। जय तेरी हो स्कंदमाता
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए,
तुम ही खंडा हाथ उठाएं।
दास को सदा बचाने आईं,
चमन की आस पुराने आई। जय तेरी हो स्कंदमाता

मां स्कंदमाता स्तोत्र

नमामि स्कन्धमातास्कन्धधारिणीम्।
समग्रतत्वसागरमपारपारगहराम्॥

शिप्रभांसमुल्वलांस्फुरच्छशागशेखराम्।
ललाटरत्‍‌नभास्कराजगतप्रदीप्तभास्कराम्॥

महेन्द्रकश्यपाíचतांसनत्कुमारसंस्तुताम्।
सुरासेरेन्द्रवन्दितांयथार्थनिर्मलादभुताम्॥

मुमुक्षुभिíवचिन्तितांविशेषतत्वमूचिताम्।
नानालंकारभूषितांकृगेन्द्रवाहनाग्रताम्।।

सुशुद्धतत्वातोषणांत्रिवेदमारभषणाम्।
सुधामककौपकारिणीसुरेन्द्रवैरिघातिनीम्॥

शुभांपुष्पमालिनीसुवर्णकल्पशाखिनीम्।
तमोअन्कारयामिनीशिवस्वभावकामिनीम्॥

सहस्त्रसूर्यराजिकांधनज्जयोग्रकारिकाम्।
सुशुद्धकाल कन्दलांसुभृडकृन्दमज्जुलाम्॥

प्रजायिनीप्रजावती नमामिमातरंसतीम्।
स्वकर्मधारणेगतिंहरिप्रयच्छपार्वतीम्॥

इनन्तशक्तिकान्तिदांयशोथमुक्तिदाम्।
पुन:पुनर्जगद्धितांनमाम्यहंसुराíचताम॥

जयेश्वरित्रिलाचनेप्रसीददेवि पाहिमाम्॥

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चैत्र नवरात्र : चौथे दिन करें मां कूष्मांडा की पूजा, जानें बीज मंत्र और आरती

चैत्र नवरात्र में चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की आदिशक्ति माना जाता है साथ ही माता दुर्गा के इस रूप को सबसे उग्र भी माना गया है।

माता दु्र्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की 8 भुजाएं होती हैं इसलिए इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है।

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मां कूष्मांडा के आठ हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प अमृतपूर्ण कलश, चक्र, गदा और माला होती है और इनके आठवें हाथ में जप की माला है। मां कुष्मांडा सिंह पर सवार होती हैं।

देवी कूष्मांडा की साधना और पूजा से आरोग्य की प्राप्ति होती है। देवी अपने भक्तों को हर संकट और विपदा से निकालकर सुख वैभव प्रदान करती हैं।

साथ ही जो देवी कूष्मांडा की भक्ति करते हैं माता उसके लिए मोक्ष पाने का मार्ग सहज कर देती हैं। माता के भक्तों में तेज और बल का संचार होता है। इन्हें किसी प्रकार का भय नहीं रहता है।

 

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मां कूष्मांडा की पूजा विधि
  • सुबह स्‍नानादि से निवृत्त होकर देवी कूष्मांडा का ध्यान करें।
  • इसके बाद दुर्गा के कूष्‍मांडा रूप की पूजा करें।
  • पूजा में मां को लाल रंग के पुष्‍प, गुड़हल या गुलाब अर्पित करें।
  • इसके साथ ही सिंदूर, धूप, दीप और नैवेद्य भी माता को चढ़ाएं।
  • माता के इस स्वरूप का ध्यान स्थान अनाहत चक्र है इसलिए देवी की उपासना में अनाहत चक्र के मिलते रंग जो हल्का नील रंग है उसी रंग के वस्त्रों को धारण करे। इससे माता के स्वरूप में ध्यान लगाना आसान होगा।
मां कूष्मांडा के मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ओम देवी कूष्माण्डायै नमः॥

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मां कुष्मांडा की आरती

कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥

लाखों नाम निराले तेरे ।

भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥

मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥

तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

मां कूष्मांडा का स्तोत्र

वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥

भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।

कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥

पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।

कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

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चैत्र नवरात्र : तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें बीज मंत्र और आरती

चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां दुर्गा का ये स्वरूप बेहद ही कल्याणकारी माना गया है। देवी चंद्रघंटा का स्वरूप परम शान्तिदायक और कल्याणकारी हैं। बाघ पर सवार मां चंद्रघंटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला हैं।

इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान हैं, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। 10 भुजाओं वाली देवी के हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र विभूषित हैं। इनके गले में सफ़ेद फूलों की माला सुशोभित रहती हैं। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्धत रहने वाली होती है।

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इनके घंटे की सी भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य-राक्षस सदैव प्रकम्पित रहते हैं। दुष्टों का दमन और विनाश करने में सदैव तत्पर रहने के बाद भी इनका स्वरूप दर्शक और आराधक के लिए अत्यंत सौम्यता और शांति से परिपूर्ण रहता है।

अतः भक्तों के कष्टों का निवारण ये शीघ्र ही कर देती हैं। इनका वाहन सिंह है। इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की प्रेत-बाधादि से रक्षा करती है। आपको बताते हैं क्या है मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्र और आरती …

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मां चंद्रघंटा की पूजा विधि
  1. मां को शुद्ध जल और पंचामृत से स्नान कराएं।
  2. अलग-अलग तरह के फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दूर, अर्पित करें।
  3. केसर-दूध से बनी मिठाइयों या खीर का भोग लगाएं।
  4. मां को सफेद कमल, लाल गुडहल और गुलाब की माला अर्पण करें और प्रार्थना करते हुए मंत्र जप करें।
  5. इस तरह देवी चंद्रघंटा की पूजा करने से साहस के साथ सौम्यता और विनम्रता में वृद्धि होती है।
मां चंद्रघंटा बीज मंत्र

“या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।”

पिंडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।

देवी चंद्रघंटा की आरती

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे काम।।
चंद्र समान तू शीतल दाती। चंद्र तेज किरणों में समाती।।

क्रोध को शांत बनाने वाली। मीठे बोल सिखाने वाली।।
मन की मालक मन भाती हो। चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।।

सुंदर भाव को लाने वाली। हर संकट मे बचाने वाली।।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये। श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय।।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं। सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।।
शीश झुका कहे मन की बाता। पूर्ण आस करो जगदाता।।

कांची पुर स्थान तुम्हारा। करनाटिका में मान तुम्हारा।।
नाम तेरा रटू महारानी। भक्त की रक्षा करो भवानी।।

 

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चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें बीज मंत्र व आरती

चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप और नौ शक्तियों में से दूसरी शक्ति हैं। मां दुर्गा का यह स्वरूप ज्योर्तिमय है।

ब्रह्मा की इच्छाशक्ति और तपस्विनी का आचरण करने वाली ब्रह्मचारिणी माता त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। साथ ही कुंडली में मंगल ग्रह से जुड़े सारे दोषों से मुक्ति मिल जाती है।

हिमाचल : इस दिन रहें अलर्ट-आंधी, बिजली गिरने, गस्टी हवाएं चलने के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी

 

देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप है अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप है। ब्रह्म का मतलब तपस्या होता है वहीं चारिणी का मतलब आचरण करने वाली।

इस तरह ब्रह्माचारिणी का अर्थ है- तप का आचरण करने वाली देवी। मां ब्रह्माचारिणी के दाहिने हाथ में मंत्र जपने की माला और बाएं में कमंडल है।

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सभी कार्य पूरे होते हैं, रुकावटें दूर होती हैं और विजय की प्राप्ति होती है।

इसके अलावा जीवन से हर तरह की परेशानियां भी खत्म होती हैं। आइए जानते हैं क्या है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, बीज मंत्र और आरती ….

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मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
  • सबसे पहले ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर लें।
  • पूजा के लिए सबसे पहले आसन बिछाएं फिर उस आसन पर बैठकर मां की पूजा करें।
  • माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि चढ़ाएं।
  • ब्रह्मचारिणी मां को भोगस्वरूप पंचामृत चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं।
  • इसके साथ ही माता को पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें।
  • इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप करें और फिर आरती करें।
देवी ब्रह्माचारिणी बीज मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

नवरात्र : व्रत के दौरान खानपान का रखें ध्यान, क्या करें क्या न करें-जानें
मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।

 

 

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हिमाचल में HAS, तहसीलदार, पंचायत अधिकारी सहित इन पदों पर निकली भर्ती-करें आवेदन

हिमाचल : पोस्ट कोड 1025, 1036 और 1072 के तहत आवेदन करने वाले दें ध्यान 

कांगड़ा : भडियाड़ा में घर से 103 पेटी अवैध शराब बरामद, शैड में थीं रखी
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शिमला में पंजाब के पूर्व मंत्री के बेटे सहित 5 चिट्टे के साथ गिरफ्तार, एक लड़की भी शामिल

गुप्त सूचना पर पुलिस स्पेशल सेल की कार्रवाई

शिमला। पंजाब के पूर्व मंत्री के बेटे सहित पांच आरोपियों को हिमाचल के जिला शिमला में पुलिस ने चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है। इनमें एक युवती भी शामिल है। गुप्त सूचना पर शिमला पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने कार्रवाई की है।

जवाली में टेंपरेरी नंबर बोलेरो से 15 पेटी अंग्रेजी शराब और बीयर बरामद

 

टीम ने शिमला के पुराने बस स्टैंड के पास एक होटल से आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 42.89 ग्राम चिट्टा बरामद किया है।

बता दें कि स्पेशल सेल तीन की टीम पेट्रोलिंग पर थी। टीम को उक्त आरोपियों की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर गुप्त सूचना मिली। सूचना मिलने के बाद टीम ने होटल में दबिश दी।

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कमरे में प्रकाश सिंह (37) पुत्र सुच्चा सिंह, मकान नंबर 512 सेक्टर 36 चंडीगढ़ व गांव लंगाह जिला बिलासपुर गुरदासपुर, अबनी (19) गांव सांगला किन्नौर, अजय कुमार (27) पुत्र चमन लाल वीपीओ नरखेरिया पंजाब यूनिवर्सिटी पटियाला, शुभम कौशल (26) पुत्र संदीप कौशल मकान नंबर 204, ब्लॉक ए कांसल सेक्टर 1 चंडीगढ़ और बलविंदर (22) पुत्र कुलदीप सिंह निवासी गांव नड्डा पीओ नयागांव मोहाली पंजाब के रूप में हुई है।
स्पेशल सेल की टीम ने जांच के दौरान 42.89 ग्राम चिट्टा बरामद किया।

मंडी : चरस सहित पति-पत्नी धरे, 45120 अफीम के पौधे किए नष्ट

 

बताया जा रहा कि पंजाब के पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह का बेटा प्रकाश सिंह पहले भी नशा तस्करी के केस में पकड़ा गया था। पुलिस पता लगा रही है कि आरोपी चिट्टा कहां से लेकर आए और कहां सप्लाई करने जा रहे थे।

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पुलिस आरोपियों के बैक वर्ड लिंकेज भी खंगाल रही है। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों से चिट्टा माफिया से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
उधर, एसपी शिमला संजीव गांधी ने मामले की पुष्टि की है।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने शिमला के निजी होटल में पांच लोगों को चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है। एसपी ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।

 

 

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चैत्र नवरात्र : पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा, ये है बीज मंत्र और आरती

चैत्र नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इसी दिन से मां का आगमन होता है और देवी पक्ष की शुरुआत होती है।

मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। आइए जानते हैं नवरात्र के पहले दिन देवी मां के शैलपुत्री रूप की पूजा कैसे करनी चाहिए।

मां शैलपुत्री पूजन विधि
  • प्रात: जल्दी उठकर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद मंदिर को अच्छे से साफ करें।
  • पूजा के पहले अखंड ज्योति प्रज्वलित कर लें और शुभ मुहूर्त में घट स्थापना कर लें।
  • अब पूर्व की ओर मुख कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और माता का चित्र स्थापित करें।
  • सबसे पहले गणपति का आह्वान करें और इसके बाद हाथों में लाल रंग का पुष्प लेकर मां शैलपुत्री का आह्वान करें।
  • मां की पूजा के लिए लाल रंग के फूलों का उपयोग करना चाहिए।
  • मां को अक्षत, सिंदूर, धूप, गंध, पुष्प चढ़ाएं. माता के मंत्रों का जप करें।
  • घी से दीपक जलाएं, मां की आरती करें, शंखनाद करें, घंटी बजाएं और मां को प्रसाद अर्पित करें।
नवरात्र के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा करते समय इन बीज मंत्रों का जाप अवश्य करें …
  • या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
  • शिवरूपा वृष वहिनी हिमकन्या शुभंगिनी
    पद्म त्रिशूल हस्त धारिणी
    रत्नयुक्त कल्याणकारिणी
  • ओम् ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:
  • बीज मंत्र- ह्रीं शिवायै नम:
  • वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्
    वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्
मां शैलपुत्री आरती

शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी

पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।

सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।

घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।

जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।

 

 

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चैत्र नवरात्र शुरू : कब और कैसे करें कलश स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त व विधि

चैत्र नवरात्र 9 अप्रैल यानी मंगलवार से शुरू हैं। हिंदू धर्म में नवरात्र का बड़ा महत्व है। नवरात्र के 9 दिन माता रानी के भक्त व्रत रखते हैं और मां की पूजा-अर्चना करते हैं। इसके अलावा नवरात्र के ये पावन दिन शुभ कार्यों के लिए बेहद ही उत्तम माने जाते हैं।

इन दिनों बिना कोई मुहूर्त देखे कई शुभ कार्य किए जाते हैं। नवरात्र में लोग घर में कलश की स्थापना करते हैं और नौ दिनों तक अखंड ज्योति भी जलाते हैं।

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चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होती है। इस साल चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि 8 अप्रैल को देर रात 11:50 बजे से शुरू होकर 9 अप्रैल को संध्याकाल 08:30 पर समाप्त होगी।

हिंदू धर्म में उदया तिथि मान है, इसलिए 9 अप्रैल को घटस्थापना या कलश स्थापना है। इस साल नवरात्र का आरंभ 9 अप्रैल मंगलवार से हो रहा है।

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घटस्थापना या कलश स्थापना का समय

9 अप्रैल को घटस्थापना या कलश स्थापना समय सुबह 06 बजकर 02 मिनट से लेकर 10 बजकर 16 मिनट तक है।

इसके अलावा 11 बजकर 57 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त है। इन दोनों मुहूर्त में घटस्थापना की जा सकती है।

चैत्र नवरात्र के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है।

‘इस दिन अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण सुबह 07: 32 से हो रहा है। ये दोनों योग संध्याकाल 05:06 बजे तक है।

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ऐसे करें कलश स्थापना
  • कलश स्थापना करने के लिए सबसे पहले पूजा घर को अच्छी तरह से साफ कर लें
  • इसके बाद एक मिट्टी का बर्तन लें और उसमें साफ मिट्टी रखें
  • अब इसमें कुछ जौ के दाने बो दें और उन पर पानी का छिड़काव करें
  • अब इस मिट्टी के कलश को पूजा घर या जहां पर माता की चौकी हो, वहां इस कलश स्थापित कर दें
  • कलश स्थापना करते और पूजा के समय अर्गला स्तोत्र का पाठ अवश्य करें
  • इसके बाद उस कलश में जल, अक्षत और कुछ सिक्के डालें और ढककर रख दें
  • इस कलश पर स्वास्तिक जरूर बनाएं और फिर कलश को मिट्टी के ढक्कन से ढक दें
  • इसके बाद दीप-धूप जलाएं और कलश की पूजा करें
कलश स्थापना मंत्र

ओम आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दव:।
पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः।।
ओम वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्काभसर्जनी स्थो वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमा सीद।

घटस्थापना में रखें इन बातों का विशेष ध्यान
  • शास्त्रों के अनुसार, कलश स्थापना या घटस्थापना में हमेशा सोने, चांदी, तांबे या फिर मिट्टी से बने कलश का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। पूजा के लिए लोहे के कलश या स्टील से बने कलश का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • कलश की स्थापना के दौरान दिशा का भी विशेष ख्याल रखें। कलश की स्थापना या तो उत्तर दिशा में या फिर पूर्व दिशा में ही करनी चाहिए।
  • कलश स्थापना करने से पहले उस स्थान को अच्छे से साफ सफाई कर लें। वहां, पर गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद ही कलश की स्थापना करें।
  • कलश स्थापना के लिए चिकनी मिट्टी और रेतीली मिट्टी को फैला लें और अष्टदल बनाएं।
  • कलश में सप्त मृत्तिका, सुपारी, सिक्का, सुगंध, सर्व औषधी, कौड़ी, शहद, गंगाजल, पंच पल्लव, पीपल, आम बरगद, गूलर और पाखर के पल्लव यदि उपलब्ध न हो तो आम के पल्लव डाल लें।
  • लाल रंग के कपड़े में नारियल लपेटकर कलश के ऊपर रख दें।
    सिंदूर से कलश में स्वास्तिक लगाएं। कलश के ऊपर मिट्टी के बर्तन में धान या चावल डालकर उसके ऊपर ही नारियल स्थापित करें।
    पूजा के बाद वेदी के ऊपर जौं को बो दें।
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चैत्र नवरात्र 2024 की तिथियां

पहला दिन – 9 अप्रैल 2024 (प्रतिपदा तिथि, घटस्थापना)—मां शैलपुत्री पूजा।

दूसरा दिन – 10 अप्रैल 2024 (द्वितीया तिथि)—मां ब्रह्मचारिणी पूजा।

तीसरा दिन – 11 अप्रैल 2024 (तृतीया तिथि)—मां चंद्रघण्टा पूजा

चौथा दिन – 12 अप्रैल 2024 (चतुर्थी तिथि)—मां कुष्मांडा पूजा

पांचवां दिन – 13 अप्रैल 2024 (पंचमी तिथि)—मां स्कंदमाता पूजा

छठा दिन – 14 अप्रैल 2024 (षष्ठी तिथि)—मां कात्यायनी पूजा

सांतवां दिन – 15 अप्रैल 2024 (सप्तमी तिथि)—मां कालरात्रि पूजा

आठवां दिन – 16 अप्रैल 2024 (अष्टमी तिथि)—मां महागौरी पूजा

नौवां दिन – 17 अप्रैल 2024 (नवमी तिथि)—मां सिद्धिदात्री पूजा, राम नवमी

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बीफ खाने को लेकर कंगना रनौत ने दी सफाई : बोलीं- ये सब बेसलेस अफवाहें

भाजपा प्रत्याशी का पुराना स्क्रीनशॉट हो रहा वायरल

मंडी। हिमाचल के मंडी संसदीय क्षेत्र से भाजपा की प्रत्याशी और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के बीफ खाने को लेकर पुराने ट्वीट खूब वायरल हो रहे हैं। कंगना ने इन सभी दावों पर सफाई दी है।

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कंगना रनौत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन दावों का खंडन किया है कि वह बीफ खाती हैं। कंगना ने लिखा, “मैं गोमांस या किसी दूसरी तरह के रेड मीट का सेवन नहीं करती हूं, ये शर्मनाक है कि मेरे बारे में पूरी तरह से बेसलेस अफवाहें फैलाई जा रही हैं।

मैं दशकों से योगिक और आयुर्वेदिक लाइफ स्टाइल की वकालत और प्रचार कर रही हूं। अब ऐसी रणनीति काम नहीं करेगी मेरी छवि खराब नहीं की जा सकती है। मेरे लोग मुझे जानते हैं और वे जानते हैं कि मैं एक गौरवान्वित हिंदू हूं और कोई भी चीज़ उन्हें कभी गुमराह नहीं कर सकती, जय श्री राम।’

विक्रमादित्य के तल्ख तेवर : बोले – कंगना का हारना तय, जयराम पर भी तीखी टिप्पणी

 

दरअसल, कंगना रनौत के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई यूजर्स ने पुराने स्क्रीनशॉट शेयर किए थे जिसमें एक्ट्रेस ने लिखा था कि बीफ खाने में बुराई ही क्या है।

कंगना ने ट्वीटर से ये साल 2019 में पोस्ट किया था। जिसमें लिखा था, बीफ या दूसरे मीट खाने में कुछ गलत नहीं हैं। नजर डालिए नीचे दिए स्क्रीनशॉट पर …

 

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बात दें कि कांग्रेस लीडर विजय वाडेत्तिवार ने कहा था कि एक बार कंगना ने खुद कहा है कि उन्होंने बीफ खाया है।

रैली में उन्होंने ये भी दावा किया कि कंगना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बीफ खाने का जिक्र किया था, इसके बावजूद उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव की टिकट दे दी है।

कांगड़ा : डमटाल में 3280 लीटर स्प्रिट और 9 लाख से अधिक नकदी बरामद

 

फिल्मों की बात करें तो आखिरी बार कंगना 2023 की फिल्म तेजस में नजर आई थीं। अब जल्द ही कंगना फिल्म इमरजेंसी में नजर आने वाली हैं, जो 14 जून को रिलीज होनी है।

इस फिल्म की प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी कंगना हैं। फिल्म में कंगना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का रोल प्ले करने वाली हैं।

 

 

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साल 2024 का पहला सूर्य ग्रहण 8 अप्रैल को, जानिए कहां-कहां दिखेगा

सोमवती अमावस्या पर लग रहा सूर्यग्रहण

नई दिल्ली। साल 2024 का पहला सूर्य ग्रहण 8 अप्रैल सोमवार को लग रहा है। सोमवार को सोमवती अमावस्या भी है। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण है, जो करीब 54 साल बाद लग रहा है।

इससे पहले ऐसा सूर्य ग्रहण 1971 में दिखाई दिया था। आपको विस्तार से बताते हैं सूर्य ग्रहण का समय और इसका प्रभाव कहां-कहां पड़ेगा।

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भारतीय समयानुसार कल रात यानी 8 अप्रैल को 9 बजकर 12 मिनट से 9 अप्रैल को रात 2 बजकर 22 बजे तक होगा। सूर्यग्रहण 5 घंटा 10 मिनट की होगी।

सूर्य ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। सूतक काल में पूजा-पाठ की मनाही होती है, लेकिन सूतक काल केवल तभी मान्य होता है, जब सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान हो।

ऊना में बड़ा हादसा : पेट्रोल से भरा टैंकर सड़क पर पलटा, भड़की आग-एक की गई जान

 

साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी लागू नहीं होगा।

सोमवार को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह सूर्य ग्रहण पश्चिमी यूरोप, पेसिफिक, अटलांटिक, आर्कटिक, मेक्सिको, उत्तरी अमेरिका (अलास्का को छोड़कर), कनाडा, मध्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भागों में, इंग्लैंड के उत्तर पश्चिम क्षेत्र और आयरलैंड में ही नजर आएगा।

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8 अप्रैल को सोमवती अमावस्या है। सोमवती अमावस्या पर दान-स्नान का विशेष महत्व होता है। जो लोग इस बार सूर्य ग्रहण के चलते सोमवती अमावस्या पर स्नान को लेकर लोग बहुत कन्फ्यूज है व जान लें कि आप बेझिझक पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी ले सकते हैं।

सोमवती अमावस्या का संबंध पितरों की कृपा पाने के लिए विशेष माना गया है। इस दिन पितरों की शांति के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाने चाहिए।

 

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सुधीर शर्मा के बाद राजेंद्र राणा ने भी मुख्यमंत्री सुक्खू को भेजा मानहानि का नोटिस

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