देहरा। केंद्रीय बजट हिमाचल प्रदेश के हितों के साथ धोखा है और इसमें पहाड़ी राज्यों की विशेष भौगोलिक तथा आर्थिक परिस्थितियों की अनदेखी की गई है। यह बात देहरा युवा कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष सुमित ठाकुर ने कही।
उन्होंने कहा कि पहली फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया। इस दौरान 16वें वित्त आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट सदन में रखी। 16वें वित्त आयोग के राज्यों के लिए आरडीजी (RDG)की सिफारिश न करने से हिमाचल की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने इसे प्रदेश की आमजन, मजदूर और किसान-बागवान के लिए काला दिन बताया है।
सुमित ने कहा कि देश में छोटे और पहाड़ी राज्यों का गठन हुआ, तो राजस्व की दृष्टि से राज्यों की स्थिति का आकलन नहीं किया गया था। वर्ष 1952 से 15 वें वित्त आयोग तक आरडीजी के रूप में इन राज्यों को ग्रांट मिलती रही।
संविधान के अनुच्छेद 275(A) के तहत राज्यों को 70 सालों से अनुदान मिलता रहा, जो राज्य कभी रेवेन्यू सरप्लस नहीं बन सकते थे, उन राज्यों के लिए आरडीजी ग्रांट बेहद आवश्यक थी। ऐसे राज्यों में विकास कार्यों और परियोजनाओं का संचालन इसी अनुदान से होता रहा, लेकिन 16वें वित्त आयोग ने आरडीजी को खत्म कर दिया है।
सुमित ठाकुर ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस कदम से प्रदेश के आम लोगों को चोट पहुंची है। हिमाचल प्रदेश से भाजपा के सात सांसद हैं, लेकिन भाजपा के लोग राज्य के प्रति केवल सत्ता में बैठी सरकार का दायित्व होना समझते हैं। यह गलत है।
सुमित ने कहा कि उन्होंने केंद्र से लोन लिमिट को तीन प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत करने की मांग की थी, लेकिन 16 वें वित्त आयोग ने भी 15वें वित्त आयोग की ओर से की गई 3 प्रतिशत की लोन लिमिट को जारी रखा है। राज्य में केवल 10 फीसदी औद्योगिक क्षेत्र है।
इन उद्योगों से राज्य को वैट और एक्साइज के रूप में 4 हज़ार करोड़ का रेवेन्यू होता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य को इस राजस्व का नुकसान हुआ है। GST आने के बाद राज्य की टैक्स लगाने की शक्ति भी छीन गई है। ऐसे में राज्य को राजस्व का बड़ा नुकसान हुआ है।