शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे की ओवरडोज के कारण वर्ष 2023 से 31 जनवरी, 2026 तक 66 लोगों की मृत्यु हुई है। इसमें से वर्ष 2023 में 8, वर्ष 2024 में 31 और वर्ष 2025 में 27 की नशे की ओवरडोज से मृत्यु के मामले सम्मिलित हैं। 01 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026 तक नशे की ओवरडोज से मृत्यु का कोई भी मामला सरकार के संज्ञान में नहीं आया है।
इस अवधि के दौरान चिट्टा सहित अन्य कुल 6246 मामले दर्ज किए गए। यह जानकारी हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक जीत राम कटवाल (झ्ंडूता) और प्रकाश राणा (जोगिन्द्रनगर) पूछे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुहैया करवाई है।
जानकारी दी गई कि नशे से संबंधित 5684 मामलों में चालान न्यायालय प्रेषित किए गए हैं। 19 मामलों में रद्द रिपोर्ट, 57 मामले अदमपता तथा 486 मामले वर्तमान में अन्वेषणाधीन हैं। न्यायालय में विचारित मामलों में से 108 मामलों में सजा हुई है, 139 मामलों में आरोपितों को बरी किया गया है तथा शेष 5437 मामले वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा नशे के रोकथाम के लिए व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। स्वापक औषधि व मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS) के प्रावधानों को कठोरता से लागू किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत नशा तस्करों द्वारा तस्करी से अर्जित अवैध सम्पत्तियों को जब्त किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा स्वापक औषधि व मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 के अभियोगों में संलिप्त अपराधियों की निगरानी के लिए प्रत्येक पुलिस थाना में एक अलग रजिस्टर भी तैयार किया गया है, जिसमें मादक पदार्थो की तस्करी के अपराधियों का पूर्ण विवरण रखा जा रहा है। साथ ही दोषसिद्ध व्यक्तियों पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।
राज्य व जिला स्तरीय समितियों का गठन किया गया है। मात्रा (5 ग्राम तक) के मामलों में, उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार धारा 35 (3) भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधान के अनुसार आरोपियों को जमानत दी जाती है।
इसके अतिरिक्त मध्यवर्ती मात्रा जोकि 5 ग्राम से अधिक व 250 ग्राम से कम है और वाणिज्य मात्रा जो कि 250 ग्राम व उससे अधिक होती है, में विषेष परिस्थितियों में न्यायालय द्वारा जमानत दी जाती है। गत 3 वर्षों में 5298 आरोपियों को जमानत मिली है।