सुभाष चौहान/ज्वालामुखी। कांगड़ा जिला के ज्वालामुखी के रैंखा के मत्याल गांव के साहिल सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। साहिल भारतीय सेना अकादमी, देहरादून से शनिवार को पास आउट हुए। उनके लेफ्टिनेंट बनने की खबर जैसे ही सामने आई, वैसे ही ज्वालामुखी के रैंखा क्षेत्र के मत्याल गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव में बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया और हर कोई इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करता नजर आया।
साहिल के पिता रिटायर्ड कैप्टन सुरेश कुमार ने बताया कि साहिल का रविवार को गांव पहुंचने पर स्वागत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि साहिल शुरू से ही अनुशासित, मेहनती और लक्ष्य के प्रति बेहद स्पष्ट सोच रखने वाला रहा है। पढ़ाई के साथ-साथ सेना में जाने का सपना उसके मन में बहुत पहले से था।
साहिल ने अपनी शुरुआती शिक्षा आरएनटी रैंखा व जमा दो तक की शिक्षा डीएवी देहरा से पूरी की। इसके बाद झंझेड़ी चंडीगढ़ से बीटेक करते करते सेना में भर्ती हो गए। फिर तीन साल सेना में अपनी सेवाएं देने के बाद एसीसी कमीशन क्लीयर किया और आज आईएमए देहरादून से लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया।
साहिल के दादा स्व. बर्फी राम उनके मार्गदर्शक रहे हैं। साहिल के दादा भी सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं यानी देश सेवा की परंपरा इस परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही है। वहीं साहिल के पिता सुरेश कुमार भी सेना से कैप्टन रिटायर हैं, वहीं साहिल के चाचा सूबेदार सुभाष चंद भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
साहिल की दादी सिमरो देवी व उनकी मां नीलम देवी ने भावुक होते हुए बताया कि बेटे को वर्दी में देखकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। रैंखा के मत्याल गांव और ज्वालामुखी क्षेत्र में साहिल की कामयाबी आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। लोग उम्मीद जता रहे हैं कि साहिल जैसे युवा न सिर्फ सीमा पर देश की रक्षा करेंगे, बल्कि हिमाचल के युवाओं को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला देंगे।