ऋषि महाजन/नूरपुर। कांगड़ा जिला के नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रणबीर सिंह निक्का से सवाल पूछे जाने का मुद्दा गरमाता जा रहा है। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अकिल बक्शी द्वारा लगाए गए गंभीर और तथ्यों पर आधारित सवालों का जवाब अभी तक विधायक की तरफ से नहीं आया है।
अकिल बक्शी का आरोप है कि विधायक जनता को जवाब देने की बजाय अपने समर्थकों के जरिए सोशल मीडिया पर निजी टिप्पणियां करवा कर सवालों से भाग रहे हैं। वहीं, कुछ लोगों ने भी विधायक द्वारा सवालों का जवाब न देकर समर्थकों के जरिए सोशल मीडिया पर निजी टिप्पणियों पर सवाल उठाया है।
पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अकिल बक्शी ने कहा कि बीते तीन वर्ष में नूरपुर में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विद्युतीकरण जैसे बुनियादी क्षेत्रों में एक भी ठोस और उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक निधि का इस्तेमाल क्षेत्र की जरूरतों पर नहीं, बल्कि अपने चाटुकारों और खासमखास लोगों को खुश करने के लिए किया गया। विकास के नाम पर सिर्फ डंगे और नालियां बनाकर वाहवाही लूटी जा रही है, जबकि क्षेत्र के मूल मुद्दे जस के तस बने हुए हैं।
बक्शी ने विधायक समर्थकों पर भी सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इन्हें न तो नूरपुर के भविष्य की चिंता है और न ही जनता की। ये लोग क्षेत्र या विधायक के हितैषी नहीं, बल्कि केवल चापलूसी और स्वार्थ की राजनीति कर रहे हैं। इन्हें विकास से नहीं, सिर्फ अपने घर भरने से मतलब है।
चुनावी वादों को लेकर भी बक्शी ने विधायक को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की तिथियों को नजरअंदाज कर जनता से पक्के घर बनाने के वादे किए गए, लेकिन आज तक उन वादों पर कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आया। जो मकान बने भी हैं, वे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने हैं, लेकिन उनका भी श्रेय लेने का प्रयास किया जा रहा है, जो जनता को गुमराह करने जैसा है।
राजनीति में उतरने के सवाल पर अकिल बक्शी ने कहा कि वे राजनीति में आने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन जब उनकी टीम गांव-गांव जाती है तो लोग उनसे कहते हैं कि “जब तक कीचड़ साफ करने कोई नहीं उतरेगा, व्यवस्था नहीं सुधरेगी।” उन्होंने दावा किया कि नूरपुर में विधायक के प्रति भारी जनाक्रोश है और वे आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं, हालांकि अंतिम फैसला समय आने पर लिया जाएगा।
वहीं, थोहड़ा पंचायत से अरविंद शर्मा, राजा का बाग से प्रवीण, ठेहड़ से सुषमा समकारिया और पुंदर से संजना ने एक स्वर में कहा कि विधायक से तीन साल का रिपोर्ट कार्ड मांगना लोकतांत्रिक अधिकार है, कोई अपराध नहीं। विधायक को चाहिए कि वे समर्थकों के जरिए हमले कराने की बजाय जनता के सवालों का जवाब दें, ताकि नूरपुर की जनता को पता चल सके कि तीन साल में उनके क्षेत्र के लिए वास्तव में क्या किया गया।