रेखा चंदेल/झंडूता। बिलासपुर जिला के औहर के एक होटल में 9वीं बटालियन द डोगरा रेजिमेंट का 78वां स्थापना दिवस बड़ी धूम धाम से मनाया गया। इसमें जिला बिलासपुर के विभिन्न स्थानों से सम्बन्ध रखने वाले भूतपूर्व शूरवीर सैनिक, वीर नारियां व उनके परिवार सदस्य उपस्थिति रहे।
हालांकि यह स्थापना दिवस 26 जनवरी, 2026 को मनाया जाना था, लेकिन किसी कारणवश यह 8 फरवरी, 2026 को मनाया गया। कार्यक्रम में सूबेदार मेजर आनरेरी कप्तान मदन लाल मुख्यतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिन्हें शाल और टोपी भेंट करके सम्मानित किया गया।
कैप्टन बिशन सिंह ने मंच संचालन करते हुए सभी उपस्थित जनसमूह का हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन किया। कार्यक्रम की शुरूआत में पलटन के उन महान शहीदों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया, जिन्होंने देश के खातिर अपने जीवन की आहुति देकर पलटन का नाम ऊंचा किया था।
आनरेरी कैप्टन अमीं चंद ने बताया कि आज हम अपनी बटालियन के स्थापना दिवस के मौके पर यहाँ जो भूतपूर्व सैनिक और वीर नारियां इक्टठे हुए है, उसका उद्देश्य यह है कि हम अपनी पुरानी यादों को तरो ताज़ा करना चाहते हैं कि किस प्रकार हमने कठिन भौगोलिक परिस्थियों वाले जम्मू कश्मीर और मणिपुर में अपनी सेवाओं को अंजाम दिया था साथ ही अपने बुजुर्गों से जो कुछ भी सीखा है उसका हस्तांतरण किया जा सके।
कैप्टन विशन सिंह ने बताया कि 9वीं बटालियन द डोगरा रेजिमेंट की स्थापना 26 जनवरी सन 1948 को जालंधर में हुई थी तब से लेकर आज तक लगातार यह बटालियन सिमित साधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्नति के मार्ग पर अग्रसर है। बटालियन के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए विभिन्न भूतपूर्व सैनिक अफसरों ने बताया कि स्थापना के बाद से नौवीं बटालियन ने भारतीय सेना द्वारा चलाए गये सभी अभियानों में भाग लिया।
भारतीय सेना में प्रथम मोटोराइज्ड इन्फेंट्री बटालियन के रूप में प्रथम बख्तरबंद डिवीज़न में शामिल हो गई । 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान बटालियन को श्रीनगर से लेह ले जाया गया । 1963 में यूएनईएफ के हिस्से के रूप में गाजा में संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए नामित किया गया था ,जहाँ इसने खेलों में सर्वश्रेष्ठ बटालियन की ट्राफी जीती ।
1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध ( ऑपरेशन एब्लेज़ और ऑपरेशन नेपाल में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई । 1971 के युद्ध की तैयारी के दौरान बटालियन ने ऑपरेशन स्टीपल चेज़ के हिस्से के रूप में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया ।
उन्होंने आगे बताया कि इस बटालियन के द्वितीय लेफ्टिनेंट बी.एस. कसाना को वीर चक्र ( मरणोंपरांत) के साथ तीन सेना पदक से भी सम्मानित किया गया था । बटालियन को ऑपरेशन रक्षक में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तरी कमांड यूनिट प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया था । बटालियन को नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए “यूएनआईएफआईएल एचओएम और एफसी बार्षिक पर्यावरण पुरष्कार से भी सम्मानित किया गया है ।
उच्च उंचाई वाले क्षेत्र में अपने अनुकरणीय पेशेवर प्रदर्शन के लिए , बटालियन को 2024 में उत्तरी सेना कमांडरों की यूनिट प्रशंशा से सम्मानित किया गया । इस कार्यक्रम में कैप्टन बिशन सिंह , सूबेदार सीता`राम , सूबेदार मेजर कुलबंत , कैप्टन राजेश , हवलदार कर्ण , हवलदार राकेश , सूबेदार सुनील, हवलदार सुभाष , सूबेदार मेजर रामलाल , सूबेदार प्रेम , कैप्टन अमरनाथ , सूबेदार हेमराज , हवलदार सुषम , हवलदार जसवंत, हवलदार चैतन्य , कैप्टन सोहन सिंह, सूबेदार अमरसिंह , सूबेदार बिशन , हवलदार अशोक, हवलदार विनोद , हवलदार संजय, हवलदार जोगिन्दर , सूबेदार अमींचंद , हवलदार भागीरथ, हवलदार अर्जुन, हवलदार विक्रम, हवलदार दिलवर, हवलदार अरविन्द सूबेदार बीरी सिंह, और कमलेश के साथ-साथ अनेक वीरनारियों ने भी भाग लिया भाग लिया। इनमें 106 वर्षीय वीरनारी कृष्णी देवी सबके लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनकर शामिल हुईं।