ऋषि महाजन/नूरपुर। नूरपुर सिविल अस्पताल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं अब सिर्फ इलाज का माध्यम नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भरोसे की सबसे मजबूत कड़ी बन चुकी हैं।
सिविल अस्पताल नूरपुर में गले की गंभीर और जटिल रसौली से पीड़ित एक बुज़ुर्ग महिला का सफल ऑपरेशन कर चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई है।
यह चुनौतीपूर्ण शल्य क्रिया सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रवीण के कुशल नेतृत्व में तथा एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. रूहानी की सतर्क निगरानी में की गई। ऑपरेशन के दौरान ओटी स्टाफ इरा शर्मा, रितु, अंजली और कुशल ने उत्कृष्ट टीमवर्क और समन्वय का परिचय दिया, जिससे यह जटिल प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और सफल रही।
डॉ. प्रवीण ने बताया कि मरीज शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के हरनेरा गांव की रहने वाली करीब 66 वर्षीय महिला थी, जो लंबे समय से गले के अगले हिस्से में उभरी बड़ी रसौली से परेशान थी। रसौली के कारण महिला को खाने-पीने और बोलने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। सभी आवश्यक चिकित्सीय जांचों के बाद सिविल अस्पताल नूरपुर में ही ऑपरेशन का निर्णय लिया गया और सफलतापूर्वक 235 ग्राम वजनी रसौली को निकाल दिया गया।
उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों में इस तरह के जटिल ऑपरेशन पर 70 से 80 हजार रुपये तक का खर्च आता है, लेकिन सिविल अस्पताल नूरपुर में यह संपूर्ण उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया गया। इससे मरीज और उसके परिवार को न सिर्फ आर्थिक राहत मिली, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी और मजबूत हुआ।
एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. रूहानी ने जानकारी दी कि ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत पूरी तरह स्थिर है और वह तेजी से स्वास्थ्य लाभ ले रही है।
अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अनुपमा शर्मा ने इस सफलता पर पूरे चिकित्सा दल को बधाई देते हुए कहा कि सिविल अस्पताल नूरपुर में अब आधुनिक तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों और समर्पित स्टाफ की बदौलत जटिल से जटिल शल्य क्रियाएं भी उच्च गुणवत्ता के साथ निःशुल्क की जा रही हैं। यह उपलब्धि सरकारी अस्पतालों की बदलती तस्वीर और आम जनता के लिए बड़ी राहत का प्रमाण है।
यह सफल ऑपरेशन न केवल एक मरीज के जीवन को नई दिशा देने वाला साबित हुआ है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थान आज किसी भी निजी अस्पताल से कम नहीं हैं।