ऋषि महाजन/नूरपुर। नूरपुर पुलिस व प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर चालकों पर की जा रही रोज़ाना कार्रवाई अब खुले विरोध में बदलने लगी है। लगातार चालान, भारी जुर्माने और ट्रैक्टर जब्ती से आक्रोशित किसानों व ट्रैक्टर मालिकों के समर्थन में स्थानीय विधायक रणवीर सिंह ने नूरपुर लोक निर्माण विभाग के विश्रामगृह में आपात बैठक बुलाई। बैठक में बड़ी संख्या में ट्रैक्टर चालक और किसान एकत्र हुए, जहां प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ जमकर नाराज़गी जताई गई।
बैठक को संबोधित करते हुए विधायक रणवीर सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पहले ही बेरोजगारी चरम पर है और ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर ही लोगों की रोज़ी-रोटी का मुख्य साधन है। एक ट्रैक्टर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि उसके साथ 7–10 परिवारों का पेट पालता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी ट्रैक्टर के पास आवश्यक कागजात नहीं हैं तो चालान करना उचित है, लेकिन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की योजनाओं के तहत चल रहे विकास कार्यों के लिए लाए जा रहे मटेरियल पर हजारों रुपए के चालान और ट्रैक्टरों को जब्त करना सरासर अन्याय है।
विधायक ने आरोप लगाया कि छोटे किसानों और ट्रैक्टर मालिकों को 15 से 25 हजार रुपए तक के जुर्माने थोपे जा रहे हैं, जिससे वे मानसिक और आर्थिक रूप से टूट रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह अत्याचार तुरंत बंद नहीं हुआ तो ट्रैक्टर चालक पुलिस थानों के बाहर अपने ट्रैक्टर खड़े कर उनकी चाबियां थाने में जमा करवा देंगे।
रणवीर सिंह ने कहा कि एक ओर सरकार गरीबों को आर्थिक सहायता और कर्ज माफी की घोषणाएं कर रही है, वहीं दूसरी ओर चालानों के जरिए गरीबों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब से आने वाली ओवरलोडेड गाड़ियां आरटीओ कार्यालय से आगे बेधड़क निकल जाती हैं, लेकिन हिमाचल के छोटे किसान और ट्रैक्टर मालिक कार्रवाई की मार झेल रहे हैं।
ट्रैक्टर मालिकों का कहना है कि उन्हें अपनी निजी जमीन से घर निर्माण के लिए पत्थर और मटेरियल ले जाने तक की अनुमति नहीं दी जा रही। जबकि वे हाथ और बेलचे से मटेरियल लोड करते हैं। उन्होंने प्रशासन से यथार्थ को समझते हुए उन्हें शांति से काम करने देने की मांग की।
बैठक के बाद विधायक सहित सभी ट्रैक्टर मालिकों ने एसडीएम नूरपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। इसके पश्चात कार्यालय के बाहर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।