ऋषि महाजन/नूरपुर। नूरपुर शहर में यूजीसी एक्ट के विरोध ने उग्र रूप ले लिया, जब सामान्य वर्ग खुलकर सड़कों पर उतर आया। चौगान मैदान से उपमंडल अधिकारी कार्यालय तक निकाली गई आक्रोश रैली में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और यूजीसी एक्ट को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग उठाई। पूरे शहर में प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यूजीसी एक्ट समाज को जातियों में बांटकर देश की एकता और अखंडता पर सीधा हमला है। वक्ताओं ने कहा कि यह कानून वर्षों से चली आ रही सामाजिक समरसता, भाईचारे और सौहार्द को तोड़ने का षड्यंत्र है। रैली के दौरान जातिवाद नहीं चलेगा, एक भारत–श्रेष्ठ भारत” और पहले हम हिंदू हैं जैसे नारे गूंजते रहे। प्रदर्शन के समापन पर तहसीलदार के माध्यम से राज्यपाल और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया।
इस अवसर पर पूर्व समिति सदस्य राकेश कुकी ने भाजपा नेतृत्व पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भाजपा के सक्रिय सदस्य हैं, लेकिन यूजीसी एक्ट जैसे जनविरोधी कानून पर पार्टी के बड़े नेताओं की चुप्पी शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर सामान्य वर्ग को कुचलने की नीति अपना रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पूर्व प्रधान सतवीर सिंह ने यूजीसी एक्ट को काला और समाज-विरोधी कानून बताते हुए सरकार को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि 19 तारीख तक इस कानून पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ, तो आंदोलन उग्र होगा और चक्का जाम जैसी स्थिति बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी हर पंचायत से सीमित संख्या में लोग आए हैं, लेकिन आने वाले दिनों में यह आंदोलन जनांदोलन का रूप लेगा।
रैली में शामिल राजेश पठानिया और शेखर पठानिया ने कहा कि यूजीसी एक्ट और आरक्षण की भारी असमानताओं से विद्यालयों में छात्रों के बीच वैमनस्य बढ़ेगा। इससे झड़पें, कानून-व्यवस्था की समस्याएं और पुलिस व न्यायपालिका पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा, जिससे समाज कई हिस्सों में बिखर सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत करते हुए न्यायपालिका का आभार जताया। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि भारत की ताकत उसकी एकता है-यदि समाज को जातियों में बांटा गया, तो देश की सामाजिक गरिमा को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। सभी ने एक स्वर में इस कानून को तुरंत वापस लेने की मांग की।