रेखा चंदेल/घुमारवीं। घुमारवीं में पांच दिवसीय राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव मेला-2026 का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक उल्लास और जनसहभागिता के साथ अत्यंत भव्य रूप में शुभारंभ हुआ।
मेले का शुभारंभ संजय कुमार, परमवीर चक्र विजेता द्वारा किया गया, जबकि प्रदेश सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। स्वतंत्रता सेनानी शैहज राम शर्मा और शंकर दास वर्मा सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों की ने शिरकत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत घुमारवीं के ऐतिहासिक शिव मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा से हुई, जिसमें स्थानीय परंपराओं, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियों तथा पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना दिया।
शोभायात्रा के मेला मैदान पहुंचने पर खूंटा गाड़ने और विधिवत पूजा अर्चना बैलों का पूजन और ध्वजारोहण कर मेले का शुभारंभ किया गया, जो क्षेत्रीय आस्था और परंपरा का जीवंत प्रतीक बना।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार ने कहा कि ऐसे मेले हमारी सांस्कृतिक पहचान के सशक्त प्रतीक होते हैं, जो समाज को एकजुट रखने और परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं को देशभक्ति, अनुशासन और समर्पण के मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यही गुण उन्हें राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने अपने संबोधन में कहा कि मेले और त्योहार हमारी समृद्ध संस्कृति और विरासत की जीवंत झलक होते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और समाज में भाईचारे तथा आपसी सौहार्द को सुदृढ़ करते हैं।
उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में केवल डिग्रियां प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग ही वास्तविक सफलता की कुंजी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रदेश के अनेक युवाओं ने उद्यमिता को अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किए हैं और अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित किए हैं।
धर्माणी ने प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। किसानों के हित में कच्ची हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 150 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है।
इसके अतिरिक्त मछुआरों के हित में रॉयल्टी दर को 7.5 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत किया गया है तथा मछली पर 100 रूपए प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार के अवसर सृजित करना है, ताकि युवाओं को पलायन न करना पड़े और स्थानीय स्तर पर ही समृद्धि सुनिश्चित हो सके।