ऋषि महाजन/नूरपुर। 'हम सबका यही है नारा, एचपी बोर्ड रहे स्कूल हमारा, हमारा स्कूल मर्ज मत करो...इसको एचपी बोर्ड करो' के नारों से नूरपुर शहर गूंज उठा। राजकीय छात्र वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नूरपुर को पीएम श्री बक्शी टेक चंद राजकीय मॉडल गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल नूरपुर में मर्ज किए जाने के आदेशों का विरोध हो रहा है।
विरोध में छात्रों ने अपने अभिभावकों के साथ नूरपुर शहर में रोष रैली निकाली और जमकर नारेबाजी की। राजकीय छात्र वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नूरपुर प्रबंधक कमेटी का कहना है कि नूरपुर शहर में इस विद्यालय के अतिरिक्त एनसीईआरटी बोर्ड का कोई स्कूल नहीं है।
इससे एचपी बोर्ड से शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। छात्र सीबीएसई की पढ़ाई तो गर्ल्स स्कूल से कर सकते हैं, लेकिन इस स्कूल के मर्ज होने से एचपी बोर्ड की शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को 8 से 10 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ सकता है।
सबसे अधिक दिक्कत छठी और सातवीं के छात्रों को हो सकती है। स्कूल प्रबंधन कमेटी, छात्रों और उनके अभिभावकों ने मांग की है कि ब्वॉय स्कूल को एचपी बोर्ड रहने दिया जाए,ताकि नूरपुर शहर में एक स्कूल एचपी बोर्ड का भी हो। इस बाबत एसडीएम नूरपुर को ज्ञापन भी सौंपा गया।
बता दें कि 1869 में स्थापित नूरपुर का ऐतिहासिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। 156 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को समेटे यह शिक्षण संस्थान अब विलय की कगार पर खड़ा है। हाल ही में जारी नोटिफिकेशन के तहत इसे पीएम श्री बख्शी टेक चंद गर्ल्स स्कूल में मर्ज करने की प्रक्रिया ने पूरे क्षेत्र में भावनात्मक लहर पैदा कर दी है। यह केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि नूरपुर की पहचान, इतिहास और भावनाओं से जुड़ा विषय बन चुका है।
1869 में एमबी सेकेंडरी स्कूल के रूप में स्थापित यह संस्थान शिक्षा का ऐसा केंद्र बना, जिसने देश को कई महान व्यक्तित्व दिए। 1928 में हाई स्कूल, 1962 में राजकीय हाई स्कूल और 1986 में सीनियर सेकेंडरी स्कूल का दर्जा प्राप्त करने वाला यह विद्यालय समय के साथ निरंतर आगे बढ़ता रहा।
इसी संस्थान से शिक्षा ग्रहण कर देश के तीसरे मुख्य न्यायाधीश मेहरचंद महाजन आगे बढ़े। संविधान सभा के सदस्य बख्शी टेकचंद, पूर्व मंत्री एवं सांसद सत महाजन, पूर्व मंत्री केवल सिंह पठानिया तथा एयर चीफ मार्शल एस चांद जैसे नाम इस स्कूल की शैक्षिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करते हैं। यह सूची स्पष्ट करती है कि यह विद्यालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि नूरपुर की शान और पहचान का प्रतीक रहा है।