राकेश कुमार/बिलासपुर। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश में स्थापित किए जा रहे नए सीबीएसई स्कूलों में अध्यापकों के लिए अलग से कैडर बनाए जाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है।
संघ का कहना है कि इन स्कूलों में वर्तमान में कार्यरत शिक्षक पूरी तरह से प्रशिक्षित, योग्य और निर्धारित चयन प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत नियुक्त हुए हैं, ऐसे में अलग कैडर बनाना उनकी योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगाने जैसा है।
संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि एक ही राज्य के सरकारी स्कूलों के लिए अलग-अलग शिक्षक कैडर बनाना न केवल विरोधाभासी है, बल्कि इससे वर्तमान शिक्षकों के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले अध्यापकों का चयन लोक सेवा आयोग अथवा चयन आयोग के माध्यम से हुआ है, जबकि अब चयन परीक्षा हिमाचल प्रदेश स्कूली शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित की जा रही है। ऐसे में यह स्थिति भ्रम और असमंजस उत्पन्न करती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हिमाचल प्रदेश बोर्ड के स्थान पर सीबीएसई (CBSE) बोर्ड को श्रेष्ठ बताया जा रहा है, तो फिर शिक्षकों की चयन परीक्षा प्रदेश बोर्ड द्वारा कराना किस आधार पर उचित ठहराया जा सकता है। संघ का यह भी कहना है कि चयन परीक्षा के लिए केंद्रीय मुख्य शिक्षक के पदों को समाप्त करना प्राथमिक शिक्षकों के साथ बड़ा अन्याय होगा।
संघ ने मांग की है कि इन सीबीएसई (CBSE) स्कूलों में पहले से कार्यरत केंद्रीय मुख्य शिक्षकों के अधीन ही नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक का समस्त प्रशासनिक नियंत्रण व संचालन यथावत रखा जाए। साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए अलग से कोई नया प्रावधान न किया जाए, बल्कि वर्तमान में चल रही सरकारी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से ही नियुक्तियां की जाएं।
प्राथमिक शिक्षक संघ ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि सीबीएसई स्कूलों और हिमाचल प्रदेश बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों के बीच किसी प्रकार का विभाजन न किया जाए। साथ ही अन्य सरकारी स्कूलों में भी सीबीएसई स्कूलों के समान आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं तथा हजारों रिक्त पड़े शिक्षक पदों को शीघ्र भरा जाए, ताकि प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सके।