रेखा चंदेल/झंडूता। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर द्वारा गुरुवार को बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसर बिलासपुर के बैठक कक्ष में साहित्यकार-कलाकार से मिलिए कार्यक्रम के अंतर्गत मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ माँ सरस्वती की दीप प्रज्ज्वलन के साथ संदेश शर्मा द्वारा माँ सरस्वती की वंदना प्रस्तुत कर किया गया।
मंच का संचालन डॉ. गायत्री शर्मा द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता ज़िला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल द्वारा की गई। कार्यक्रम का आयोजन दो सत्रों में किया गया । प्रथम सत्र में साहित्यकार संदेश शर्मा का जीवन एवं कृतित्व वृत्त प्रीति मधु एवं अरुण डोगरा का जीवन एवं कृतित्व वृत्त डॉ. शालिनी शर्मा द्वारा पढ़ा गया।
कार्यक्रम में अरुण डोगरा को उनके साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए तथा संदेश शर्मा को कला एवं साहित्य के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए डायरी, पैन, मफ़लर, टोपी देकर सम्मानित किया गया।
दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें रवीन्द्र भट्टा द्वारा “ एक अजीब सी खामोशी छाई है, न जाने कब क्या होगा”, रवीन्द्र कुमार शर्मा ने पहाड़ी रचना “मेरे गाँवा री पगडण्डी किती पधरी किती चढ़ाई, किती बिल्कुल कल्ली सुनसान पत्थरां ने मरिरी सै तंग उतराई”, बृजलाल लखनपाल ने "सब कुछ अपना लुटाइ गया, केहड़ा बुढ़ापा आईये गया” पहाड़ी गीत प्रस्तुत किया।
संदेश शर्मा ने “बसंत में बसंत की छटा निहारिए”, तृप्ता कौर मुसाफिर ने “आओ मिल कर मंगल गाएं”, प्रीति शर्मा मधु ने “ल़डकियों के हाथों में तो बस, चकला, बेलन और रोटी का किस्सा है”, डॉ० शालिनी शर्मा ने “वे पहली बार आए” रचना से अपनी प्रस्तुति दी।
सुमन चड्डा ने "जीवन की आपा घाटी में", कर्मवीर कंडेरा ने "दिल की सरहद कविता", अरुण डोगरा ने "इस शहर में इंसान बिकता हैं" ग़ज़ल प्रस्तुत की। रविंदर चंदेल कमल ने "शोर ही शोर चहूं ओर है यौन अपराध, मानव तस्करी कई नए राज चौकाने वाले है", केशव शर्मा ने "बाल की खाल उतारना तो कोई उससे सीखे", अमर नाथ धीमान ने " मुहब्बत च आकखी ते आँजु बड़े बगदे", सुरेंद्र मिन्हास ने "घाघस" जोकि जिला बिलासपुर की महत्वपूर्ण जगह है पर रचना प्रस्तुत की जिसकी पंक्तियाँ थी "पुल पर खडोई खड्डा री धारा बरसाती बगदे पथर गटे सारे, स्याले चलदी बर्फानी हवा”, जीत राम सुमन ने "आओ गीत को संगीत दें" शीर्षक से रचना प्रस्तुत की पंक्तियाँ थी "उजड़ न जायें आशियाने कहीं आओं आशियाने संवार लें" डॉ० गायत्री शर्मा ने "स्वरचित रचना प्रस्तुत की" जिसकी पंक्तियाँ थी "ये क्या हुआ", कोमल शर्मा ने "औरों की खातिर", आरती ने "बेटियों" पर कविता प्रस्तुत की। चिंता देवी द्वारा गोविंद सागर डैम के उपर गीत की शानदार प्रस्तुतियां दी।
अंत में ज़िला भाषा अधिकारी ने अपने सम्बोधन में सभी साहित्यिकारों का आभार प्रकट करते हुये अवगत करवाया कि साहित्यकारों/ कलाकारों को विभाग इसी तरह उनके साहित्य/ कला के क्षेत्र में दिए गए सराहनीय योगदान के लिए सम्मानित करने की शृंखला जारी रखेगा तथा नवोदित साहित्यकारों/ कलाकारों को मंच मिल सके ऐसा प्रयास विभाग का रहता है। इसके साथ ही विभागीय परियोजनाओं की जानकारी भी साहित्यकारों को दी गई।