ऋषि महाजन/नूरपुर। कांगड़ा जिला के नूरपुर के चौगान मैदान में प्रस्तावित बृजराज खेल स्टेडियम 35 वर्ष से सिर्फ शिलान्यास, सर्वे और घोषणाओं तक सीमित है।
1990 से लेकर 2020 तक तीन शिलान्यास, करोड़ों की स्वीकृतियां, एचपीसीए को जमीन का आवंटन और वापसी, बार-बार बदला डिज़ाइन, लेकिन परिणाम अब भी वही है। स्टेडियम अधूरा और खिलाड़ी इंतजार में। स्थानीय युवाओं का धैर्य अब टूटने की कगार पर है।
16 फरवरी 1990 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और पूर्व विधायक सत महाजन ने स्टेडियम का पहला शिलान्यास किया था।
मैदान को समतल करने पर लोक निर्माण विभाग ने करीब 1 लाख रुपये खर्च भी कर दिए थे, लेकिन सरकार बदलते ही परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई और मैदान पशुओं का चरागाह बनकर रह गया।
13 अगस्त 1996 को कांग्रेस सरकार ने दूसरा शिलान्यास किया। पूर्व सांसद और विधायक सत महाजन ने सांसद निधि से 7 लाख रुपये दिलाकर तारबंदी करवाई।
2002 में वीरभद्र सिंह की सरकार लौटी तो राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता के मंच से स्टेडियम निर्माण की घोषणा हुई। 1 करोड़ 83 लाख रुपये स्वीकृत हुए और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने स्थल को उपयुक्त बताया, लेकिन 2007 में फिर सरकार बदली तो निर्माण ठप हो गया।
इसके बाद भाजपा सरकार ने चौगान की जमीन एचपीसीए को सौंप दी, लेकिन पांच साल में एक भी ईंट नहीं लगी। स्थानीय लोगों के अनुसार, “उल्टा पहले से मौजूद ईंटें व सरिया तक उखाड़ ले जाए गए।
2017 में कांग्रेस सरकार ने जमीन वापस ली, पर सरकार बदलते ही परियोजना फिर रुक गई।
2020 में तत्कालीन वन, युवा एवं खेल मंत्री राकेश पठानिया ने 10 करोड़ रुपये के बहुउद्देश्यीय स्टेडियम का शिलान्यास किया। इसमें 400 मीटर सिंथेटिक ट्रैक, इंडोर स्टेडियम और आधुनिक सुविधाओं का वादा था, लेकिन आज हाल यह है कि न ट्रैक बना, न स्टैंड है। इंडोर स्टेडियम की फ्लोरिंग उखड़ चुकी है और बारिश में छत से पानी टपकता है।
सबसे बड़ा विवाद : 300 मीटर का गलत ट्रैक
खेलो इंडिया के तहत बनाए जा रहे ट्रैक को विशेषज्ञों ने नियम विरुद्ध करार दिया। यह न 200 मीटर है, न 400 मीटर—बल्कि गलत माप का 300 मीटर ट्रैक। नियमों के अनुसार ऐसे ट्रैक को मंजूरी ही नहीं मिल सकती।
इस डिज़ाइन गड़बड़ी के चलते काम रोकना पड़ा। स्थानीय खेल प्रेमियों का सवाल ह है जब 2002 वाला मानक डिज़ाइन सही था, तो उसे तोड़ा क्यों गया?
स्टेडियम अब तक खेल विभाग को हस्तांतरित ही नहीं किया गया और एसडीएम कार्यालय के अधीन पड़ा है, जिससे रखरखाव लगभग शून्य रहा।
स्टेडियम को खेल विभाग के अधीन लाया जाए। 200 या 400 मीटर का मानक ट्रैक दोबारा बनाया जाए, 35 साल पुरानी परियोजना की टाइम बाउंड मॉनिटरिंग फाइनल ब्लूप्रिंट की सार्वजनिक जानकारी जारी की जाए।
हाल ही में युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के निदेशक शिवम प्रताप सिंह, पूर्व विधायक अजय महाजन और जिला खेल अधिकारियों ने विस्तृत निरीक्षण किया। विभाग ने नया ब्लूप्रिंट केंद्र सरकार को भेजने की पुष्टि की है। इससे 35 वर्ष से अटकी परियोजना पर एक बार फिर उम्मीद जगी है कि शायद इस बार स्टेडियम का सपना साकार हो सके।
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