अंकित चौधरी/सूरज डिंपू/हरिपुर। कांगड़ा जिला के देहरा विधानसभा क्षेत्र की हरिपुर तहसील के तहत बंगोली पंचायत स्थित गुरु स्थान बाबा बाजी साहिब रोड़ डिब्बर से जुड़ा एक रोचक किस्सा हम आपको बताने जा रहे हैं। एक वक्त में रोड़ डिब्बर से पंज बड़ दूर नहीं था। लोग आंख झपकते ही बाबा बाजी साहिब की असली तपोस्थली और समाधि स्थल की झलक पा लेते थे, जोकि पौंग डैम में है।
ऐसा संभव होता था एक दूरबीन के कारण। कई लोगों को इस बारे जानकारी होगी, लेकिन बहुत से लोग दूरबीन के बारे नहीं जानते होंगे। ये दूरबीन आज भी स्माध बाबा बाजी साहिब पंज बड़ वाले गुरु स्थान रोड़ डिब्बर के बाहर अवशेष के रूप में मौजूद है। इस दूरबीन को गुम्बदनुमा पत्थर में फीट किया गया था। इस पत्थर में बीच में जापान से मंगवाया शीशा फीट किया गया था और दो तरफ छेद किए गए थे। लोग एक छेद से देखते थे और दूसरी तरफ से पंज बड़ के साफ-साफ दर्शन होते थे।
ऐसा लगता था कि देखने वाला व्यक्ति पंज बड़ में ही मौजूद हैं। पुराने गुरु स्थान के केयर टेकर सुशील कुमार उर्फ काका ने बताया कि जहां बाबा जी आराम करते थे, वहां इस दूरबीन को लगाया हुआ था। इस दूरबीन को जापान से मंगवाया था। इसे ऊंचे स्थान पर लगाया हुआ था।
इस दूरबीन से पुराना पंज बड़ साफ साफ दिखाई देता था। लोग 7-8 किलोमीटर तक साफ देख सकते थे। किसी कारणवंश यह टूट गई तो इसे पुराने मंदिर के गेट के सामने रखा गया है। बहुत सारे लोग अभी इसके बारे पूछते हैं, जिन्हें इसके बारे जानकारी है।