रेखा चंदेल/घुमारवीं। नगर परिषद घुमारवीं के लिए अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान (ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट) द्वारा 20 जनवरी 2025 को एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में डॉ. केतना अतुल मातकर ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) और स्वच्छ सर्वेक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की।
कार्यक्रम में नगर परिषद के अधिकारी, सफाई कर्मचारी, स्वयं सहायता समूह के सदस्य, टैक्सी यूनियन के प्रतिनिधि एवं अन्य हितधारक शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य नगर क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना, कचरा प्रबंधन की वैज्ञानिक प्रणाली को अपनाना और स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करना था।
डॉ. केतना अतुल मातकर ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों को घर-घर कचरा पृथक्करण, गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग संग्रहित करने, गीले कचरे से खाद निर्माण और सूखे कचरे के पुनर्चक्रण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। इसके अलावा, प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निपटान, एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करने तथा कचरा संग्रहण और परिवहन की बेहतर व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।
सफाई कर्मचारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उनकी सुरक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों के उपयोग और नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सफलता के लिए नागरिकों, स्वयं सहायता समूहों, व्यापारिक संगठनों, टैक्सी यूनियन और शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
स्वच्छ सर्वेक्षण से संबंधित जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि स्वच्छता रैंकिंग, नागरिक फीडबैक, नवाचार और सतत स्वच्छता गतिविधियों का महत्व है।
प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के दौरान सूखा कचरा (कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच) और गीला कचरा (भोजन के अवशेष, सब्जियों के छिलके, चाय पत्ती) अलग करने की प्रक्रिया को समझा। सूखा कचरा नीले डस्टबिन और गीला कचरा हरे डस्टबिन में डालना ज़रूरी है, ताकि रीसाइक्लिंग और खाद निर्माण सही तरीके से हो सके।