रेखा चंदेल/झंडूता। बेशक सरकारें हर घर नल से जल पहुंचाने के दावे करती हैं, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह दावे बेमानी से लगते हैं। उनके घरों से नल उतना ही दूर होता है, जितनी उनकी बेबसी होती है।
ऐसा ही मामला हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला की तहसील झंडूता के छोटे से गांव खालसाय निवासी निर्धन और बीमारी से पीड़ित परिवार का है। गांव वासी श्याम लाल और उनकी पत्नी अपने दो बच्चों के साथ बेबसी भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। हालात ऐसे कि खाने के लिए अन्न की दिक्कत, पीने के लिए पानी की दिक्कत, बीमारी से निजात पाने के लिए दवाइयों की दिक्कत।
करीब ढाई साल से बीमारी से लाचार श्याम लाल के घर नल नहीं था। उनके घर से करीब 350 मीटर दूर से पानी की पाइपों को बिछाकर कनेक्शन लगना था। इसके लिए कम से कम 50000 रुपए तक खर्च का अनुमान था। बीमारी से जंग लड़ रहे श्याम लाल के लिए इस रकम का इंतजाम काफी मुश्किल था।
हैरानी की बात यह है कि विभाग या कोई नेता भी उनके जख्मों पर मरहम लगाने नहीं पहुंचा। ऐसे में इंसानियत संस्था के प्रधान पवन चंदेल परिवार के लिए मसीहा बनकर आए। उन्होंने अपनी जेब से लगभग 12000 के खर्च कर प्लास्टिक की पाइपों को बिछाकर श्याम लाल के घर तक नल और जल दोनों को पहुंचाने का कार्य किया। इस कार्य में इंसानियत संस्था के वरिष्ठ सदस्य अमन चंदेल, मोहिंदर सिंह, उमेश, मोनू और शिव धीमान का भी सहयोग रहा।