राकेश चंदेल/बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला के उपमंडल स्वारघाट के तहत आने वाली स्वारघाट-मतनोह-मंझेड-बागछाल संपर्क सड़क पिछले करीब तीन-चार महीनों से बंद पड़ी है, जिससे आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कुटेहला पंचायत के पूर्व प्रधान एवं समाजसेवी बाल कृष्ण ठाकुर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग उठाई है।
जानकारी के अनुसार, कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर थापना के पास फ्लाईओवर व पुल निर्माण कार्य चल रहा है। इसी निर्माण कार्य के चलते यह सड़क बंद की गई थी, जो थापना से काथला, मंझेड, मतनोह, बागछाल सहित कई गांवों को स्वारघाट से जोड़ने वाली मुख्य जीवनरेखा है।
शुरुआत में प्रशासन द्वारा इस मार्ग को एक माह के लिए बंद किया गया था, लेकिन निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण यह अवधि लगातार बढ़ती गई और अब तीन-चार माह बीत जाने के बावजूद सड़क बहाल नहीं हो पाई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान एक अस्थायी रास्ता भी बनाया गया था, जिससे लोगों व स्कूली बच्चों को राहत मिल रही थी, लेकिन अब वह रास्ता भी पूरी तरह बंद हो चुका है। इससे ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि इस स्थान पर पहले भी एक हादसा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं लाई गई।
सड़क बंद होने के कारण थापना, लोलमा, बैशका, नाल, पंगा, अपर पंगा, मंझेड, मतनोह, भुलान, सुरल सहित कई गांवों के लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। इस मार्ग पर चलने वाली एकमात्र बस सेवा भी बंद हो गई है, जिससे स्कूली व कॉलेज के विद्यार्थियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी देरी हो रही है। युवक मंडल मंझेड के प्रधान निर्मल सिंह ठाकुर, महिला मंडल प्रधान सुमन ठाकुर, पूर्व उपप्रधान रामपाल ठाकुर सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सड़क बंद होने से समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। लोगों को थापना से कैंचीमोड़ या जकातखाना-पंजपीरी मार्ग से होकर लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।
पूर्व प्रधान बाल कृष्ण ठाकुर ने प्रशासन व संबंधित कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनी निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने में विफल रही है, जबकि प्रशासन की ओर से अल्टीमेटम भी दिया जा चुका है। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और जल्द से जल्द सड़क को बहाल किया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।