शिमला। हिमाचल प्रदेश में राजकीय विद्यालयों में कार्यरत वोकेशनल अध्यापकों को वर्तमान में निजी कंपनियों व सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों के अधीन रखा गया है। वर्तमान में यथास्थिति बनी रहेगी।
यह जानकारी हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल के सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने मुहैया करवाई है।
जानकारी दी गई कि यह योजना भारत सरकार द्वारा निर्धारित एवं अधिसूचित दिशानिर्देश अनुरूप स्किल इंडिया मिशन के अधीन क्रियान्वित की जा रही है तथा इन व्यावसायिक शिक्षकों को शिक्षा विभाग द्वारा सीधे मानदेय की अदायगी नहीं की जा सकती है।
एक अन्य सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जानकारी दी है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जेबीटी के 273, टीजीटी के 683 और प्रवक्ता विद्यालय (नई व्यवस्था) के 107 पद सरप्लस हैं।
सरकार द्वारा युक्तिकरण एक सतत् प्रक्रिया के रूप में अपनाया गया है, जिसका उद्देश्य स्कूलों में उपलब्ध अध्यापकों का संतुलित एवं आवश्यकता आधारित वितरण सुनिश्चित करना है। यह प्रक्रिया समय-समय पर विभिन्न न शैक्षणिक सत्रों में छात्र नामांकन विद्यालयों की भौगोलिक स्थिति, विषयवार आवश्यकता तथा पदों की उपलब्धता के आधार पर की जाती है।
यह एक गतिशील एवं निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसे आवश्यकता अनुसार आगे भी जारी रखा जाएगा। यह सवाल पांवटा साहिब के विधायक सुखराम चौधरी ने पूछा था।