हिमालय की शांत वादियों में बसे हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र से निकलकर विनय कपूर ने अपनी पाक कला के जुनून से भारतीय स्वाद को वैश्विक मंच तक पहुंचाया है। प्रकृति, पारंपरिक खेती और पहाड़ी रसोई की खुशबू के बीच पले-बढ़े विनय कपूर के लिए भोजन केवल स्वाद नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है।
अपने करियर के दौरान उन्होंने देश और विदेश के प्रतिष्ठित किचनों में काम किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय व्यंजनों को नई पहचान दी। उनकी पाक यात्रा उन्हें मॉरिशस, न्यूयॉर्क शहर (अमेरिका) और लक्ज़री रिसॉर्ट्स में मालदीव तक लेकर गई, जहाँ उन्होंने दुनिया भर के मेहमानों को भारतीय स्वाद सेपरिचित कराया।
आज एक फ्रीलांस शेफ के रूप में विनय कपूर हिमाचली पाक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं। विशेष रूप से हिमाचली धाम जैसे पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से वह हिमालय के असली स्वाद और संस्कृति को दुनिया तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।
हिमाचली संस्कृति की सबसे अनमोल परंपराओं में से एक है हिमाचली धाम - एक पवित्र और उत्सवपूर्ण भोज जो कांगड़ा जिला की समृद्ध पाक विरासत का प्रतीक है। पारंपरिक रूप सेविवाह, धार्मिक समारोहों और सामुदायिक उत्सवों में परोसी जाने वाली धाम केवल भोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और सामुदायिक अनुष्ठान है जो मिलजुल कर रहने की भावना को दर्शाता है।
धाम को पारंपरिक रूप से बोटी कहलाने वाले वंशानुगत ब्राह्मण रसोइयों द्वारा तैयार किया जाता है। यह भोजन पूर्णतः सात्विक होता है अर्थात इसमें प्याज, लहसुन और टमाटर का प्रयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय धीमी आँच पर पकाने की विधि, दही आधारित ग्रेवी, दालें और संतुलित मसालों का उपयोग करके गहरे और संतोष देने वाले स्वाद तैयार किए जाते हैं।
परंपरा के अनुसार अतिथि ज़मीन पर एक साथ बैठते हैं और भोजन पत्तों की थालियों में परोसा जाता है जो विनम्रता, समानता और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। प्रत्येक व्यंजन एक विशेष क्रम में परोसा जाता है जिससे भोजन का संतुलित अनुभव बनता है। पारंपरिक व्यंजनों में राजमा मदरा, सेपूबड़ी, तेलिया दाल, कढ़ी, चना दाल और मीठे चावल आदि शामिल होते हैं जो हिमाचल की पाक पहचान को दर्शाते हैं।
विनय कपूर का कहना है कि “मेरे लिए हिमाचली धाम के वल भोजन नहीं है यह संस्कृति, आध्यात्मिकता और एक ऐसी परंपरा है जो लोगों को एक परिवार की तरह जोड़ती है।”