ऋषि महाजन/नूरपुर। किसी ने 21 साल अपनी जिंदगी के दिए तो किसी ने परिवार की जिम्मेदारियों के बीच वर्षों तक सरकारी परियोजनाओं में सेवाएं दीं। उम्मीद थी कि इतने लंबे अनुभव और सेवा के बाद रोजगार का सिलसिला बना रहेगा, लेकिन करीब एक साल पहले 166 कर्मचारियों को परियोजनाओं से हटा दिया गया। अब ये कर्मचारी एक साल से दोबारा रोजगार मिलने की राह ताक रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश वन विभाग के तहत मिड हिमालय प्रोजेक्ट और इसके बाद इको सिस्टम क्लाइमेट प्रूफिंग प्रोजेक्ट में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें दोबारा रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था। कर्मचारियों के मुताबिक कई महीने बीत गए, लेकिन आश्वासन अब तक धरातल पर नहीं उतर पाया।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी के महत्वपूर्ण 21 वर्ष इन परियोजनाओं को दिए। अब उम्र बढ़ने के कारण नए सिरे से रोजगार तलाशना मुश्किल हो गया है। परिवार की जिम्मेदारियां और रोजमर्रा के खर्च पहले की तरह हैं, लेकिन आय का जरिया बंद हो चुका है।
कर्मचारियों ने बताया कि रोजगार बहाली की मांग को लेकर वे सरकार और जनप्रतिनिधियों तक अपनी आवाज पहुंचा चुके हैं। मुख्यमंत्री से लेकर स्थानीय नेताओं तक मामला उठाया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि सरकार के प्रोजेक्टों को वर्षों देने के बाद आज उन्हें ही रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है।
रोजगार से वंचित महिला कर्मचारियों सुदेश कुमार निवासी गारन, रंजू बाला निवासी देहरी, सुनीता देवी निवासी तलाड़ा, रमनजोत कौर निवासी बास बज़ीरा, चंचला देवी निवासी गनोह, वंदना देवी निवासी भुगनाड़, निशा देवी निवासी धनेटी, किरण रेखा निवासी राजा का तालाब, सुनीता कुमारी निवासी बड़ी बतराहण और सुदेश कुमारी निवासी दरकाटी सहित अन्य कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा साझा की।
उन्होंने कहा कि करीब एक साल से रोजगार की आस में इंतजार कर रहे हैं। इस उम्र में नया काम तलाशना आसान नहीं है। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
लगातार अनदेखी से परेशान कर्मचारियों ने अब भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा से फतेहपुर में मुलाकात की। कर्मचारियों ने अपनी समस्या उनके समक्ष रखी और न्याय की लड़ाई में सहयोग मांगा।
मदन राणा ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने परियोजनाओं को अपनी जिंदगी के 21 वर्ष दिए, उन्हें इस उम्र में घर बैठाना उचित नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन कर्मचारियों को जल्द पुनः रोजगार देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो भारतीय मजदूर संघ कर्मचारियों के समर्थन में सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा।
अब 166 कर्मचारियों की नजर सरकार के फैसले पर टिकी है। कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी तरह की कृपा नहीं मांग रहे, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद रोजगार और परिवार के भविष्य की सुरक्षा चाहते हैं। उनका सवाल है कि जब उन्होंने लंबे समय तक सरकारी परियोजनाओं को अपनी सेवाएं दीं, तो आज उनके रोजगार के लिए कोई रास्ता क्यों नहीं निकाला जा रहा।