ऋषि महाजन/नूरपुर। नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एवं रणजीत बख्शी जनकल्याण सभा के अध्यक्ष अकिल बख्शी ने विधायक रणबीर सिंह निक्का की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से विधायक प्राथमिकता योजना के तहत एक भी प्रस्ताव सरकार को नहीं भेजा गया। इसका सीधा नुकसान नूरपुर को हुआ है और करीब 16 अहम विकास परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं।
अकिल बख्शी ने आरोप लगाया कि विधायक निधि का उपयोग संतुलित और न्यायसंगत तरीके से नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि नूरपुर की कुछ पंचायतों को विधायक निधि से लाखों रुपए दिए गए, जबकि कई पंचायतों को एक रुपया तक नहीं मिला।
उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए बताया कि माइनिंग बेल्ट की चार पंचायतों को मात्र एक वर्ष में 36 लाख रुपए की राशि दी गई, जबकि दूसरी ओर 25 पंचायतों को कुल मिलाकर केवल 30 लाख रुपए आवंटित किए गए। इसका औसत प्रति पंचायत सिर्फ 1 लाख 20 हजार रुपए बैठता है, जो विकास के नाम पर मजाक है।
अकिल बख्शी ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक ने अपने निजी व्यापारिक हितों को साधने के लिए उद्योग विभाग से खनन क्षमता बढ़ाने और नई माइनिंग नीति बनाने की पैरवी की, जिससे क्षेत्र में अवैध खनन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही उन्होंने विधायक द्वारा चुनाव आयोग को दिए गए संपत्ति शपथ पत्र पर भी सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में नूरपुर विधानसभा में एक भी नई बड़ी विकास योजना नहीं आई। उदाहरण देते हुए अकिल बख्शी ने बताया कि जौंटा क्षेत्र में वर्षा शालिका के लिए 1.20 लाख रुपए विधायक निधि से स्वीकृत दिखाए गए, लेकिन मौके पर ऐसी कोई शालिका मौजूद नहीं है। इसी तरह एक खेल मैदान के लिए 40 हजार रुपए स्वीकृत बताए गए, पर वहां भी कोई कार्य नजर नहीं आता।
अकिल बख्शी ने मांग की कि विधायक निधि के तहत किए गए सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि नूरपुर के विकास को जानबूझकर क्यों नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि जनता अब सवाल पूछ रही है और जवाबदेही तय होना जरूरी है।
इन आरोपों पर जब विधायक रणवीर सिंह निक्का से संपर्क किया गया तो उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसका जवाब मैं नहीं, नूरपुर की जनता उन्हें देगी।