ऋषि महाजन/नूरपुर। पिछले तीन वर्षों से ठप पड़ी पठानकोट-जोगिंदरनगर रेल सेवा को लेकर एक बार फिर रेलवे प्रशासन ने आश्वासन दिया है।
25 दिसंबर को जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे भारत जोड़ो अभियान एवं लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान की राष्ट्रीय कोर समिति के सदस्य पीसी विश्वकर्मा को रेलवे की ओर से कहा गया है कि जनवरी माह में यह रेलगाड़ी पुनः चला दी जाएगी, लेकिन यह वादा हकीकत बनेगा या एक और आश्वासन साबित होगा यह सवाल अब भी बना हुआ है।
पीसी विश्वकर्मा ने बताया कि उत्तर भारत के रेलवे महाप्रबंधक अशोक कुमार के निमंत्रण पर बड़ौदा स्थित रेल भवन में कांगड़ा रेल वैली को लेकर सौहार्दपूर्ण भेंट-वार्ता आयोजित हुई। बैठक में महाप्रबंधक ने स्वीकार किया कि हालिया बरसात के दौरान कांगड़ा घाटी का रेल ट्रैक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ था, जिसकी मरम्मत का कार्य तेजी से किया जा रहा है। ट्रैक के दोनों ओर मजबूत डंगे लगाने का कार्य भी प्रगति पर बताया गया।
रेलवे महाप्रबंधक ने पठानकोट के समीप चक्की पुल के निर्माण से संबंधित वीडियो भी दिखाया और कहा कि पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब तकनीकी दक्ष इंजीनियरों द्वारा अंतिम निरीक्षण के बाद रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जिसके उपरांत रेल सेवाएं बहाल की जाएंगी।
बैठक में पीसी विश्वकर्मा ने सीधे और स्पष्ट शब्दों में रेलवे से मांग की कि रेल सेवाओं की बहाली की निश्चित तिथि घोषित की जाए। इस पर रेलवे महाप्रबंधक ने आश्वासन दिया कि जनवरी के मध्य अथवा अंत तक कांगड़ा रेल वैली की सभी ट्रेनें पुनः संचालित कर दी जाएंगी।
हालांकि बातचीत के दौरान रेलवे प्रशासन ने यह भी स्वीकार किया कि कांगड़ा घाटी में ट्रेनें चलाने से रेलवे को आर्थिक घाटा होता है। इस पर पी.सी. विश्वकर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत कोई मुनाफाखोर संस्था नहीं, बल्कि एक कल्याणकारी राज्य है। हर नागरिक को बुनियादी सुविधाएं देना सरकार और रेलवे का कर्तव्य है।
पीसी विश्वकर्मा ने साफ चेतावनी दी कि यदि जनवरी माह में ट्रेनें बहाल नहीं होती तो फरवरी में एक बार फिर आंदोलन और धरना दिया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि 26 जनवरी तक कांगड़ा रेल वैली में रेल सेवाएं हर हाल में शुरू होंगी और अब इस तिथि को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
तीन वर्षों से जनता इंतजार कर रही है अब सवाल यही है कि रेलवे का वादा पटरी पर उतरेगा या आंदोलन फिर तेज होगा ?