ऋषि महाजन/नूरपुर। अमृत भारत योजना के तहत उत्तर भारत में रेलवे स्टेशनों के सौंदर्यीकरण करने के लिए कुल 2216 करोड़ रुपये व हिमाचल के 5 रेलवे स्टेशनों के लिए 45.5 करोड़ बजट आवंटित किया जा रहा है। वहीं, पिछले तीन वर्ष से कांगड़ा घाटी की नैरो गेज ट्रेनें पूरी तरह ठप पड़ी हैं। ऐसे में स्टेशन निर्माण की बातें करना लोगों को गुमराह करने जैसा है।
स्थानीय निवासी अंकित, अभिषेक व शुभम का कहना है कि जब ट्रेनें ही नहीं चल रहीं, तो अमृत योजना के तहत स्टेशन बनाने का क्या औचित्य है। यह जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही कांगड़ा घाटी की रेल व्यवस्था लगातार बदहाल होती चली गई, जिससे आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि 2014 के बाद से कांगड़ा घाटी की नैरो गेज रेल सेवा पूरी तरह बदहाल हो चुकी है, जिससे आम लोगों, छात्रों, मरीजों और कारोबारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेल मंत्री संसद में केवल आश्वासन देते आए हैं, लेकिन आज तक जमीन पर कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आया।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आज तक धरातल पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। रेल मंत्री व सांसद केवल लोकसभा में आश्वासन देते नजर आए, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। इन्होंने रेल मंत्री से आग्रह किया कि वे स्वयं कांगड़ा घाटी का दौरा कर जमीनी हालात का निरीक्षण करें, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
भारत जोड़ो एवं लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य पीसी विश्वकर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि वे दिल्ली में केंद्रीय नेताओं से बार-बार मिलने जाते हैं, लेकिन क्या उन्होंने कभी कांगड़ा रेल वैली की वर्षों पुरानी समस्या को गंभीरता से उठाया? उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन और सरकार की नीतियों की आलोचना तो की जाती है, लेकिन कांगड़ा रेल मुद्दे पर चुप्पी क्यों?
विश्वकर्मा ने बताया कि वे कांगड़ा की रेल व्यवस्था को लेकर पांच बार जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने सांसद पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले पठानकोट तक सभी ट्रेनें बहाल करवाई जाएं, फिर ब्रॉड गेज की बात की जाए। अमृत स्टेशन तभी सार्थक होंगे, जब ट्रेनों का संचालन नियमित रूप से होगा।
वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुदर्शन शर्मा का कहना है कि सिर्फ 200 मीटर का क्षतिग्रस्त रेल ट्रैक चार वर्ष में भी ठीक नहीं हो पाया, जबकि 30 हजार करोड़ रुपये के ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट का ढोल पीटा जा रहा है। हकीकत यह है कि धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांगड़ा रेल ट्रैक विश्व धरोहर की वेटिंग लिस्ट में है, जिसका स्टेटस फिलहाल बदला नहीं जा सकता।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पठानकोट तक ट्रेनें बहाल नहीं की गईं, तो वे 25 दिसंबर को जंतर-मंतर पर अकेले धरने पर बैठेंगे।