राकेश कुमार/बिलासपुर। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा विभाग द्वारा 23 सितंबर, 2025 को जारी न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम की अधिसूचना के खिलाफ फिर मोर्चा खोल दिया है। संघ ने निर्णय लिया है कि 1 मार्च, 2026 (रविवार) को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में आग्रह रैलियां आयोजित की जाएंगी।
उपायुक्तों के माध्यम से मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और उच्च अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की जाएगी। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों को नजरअंदाज किया गया तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार की होगी। संघ अध्यक्ष रमेश शर्मा ने दावा किया है कि रैलियों में 100 प्रतिशत प्राथमिक शिक्षक भाग लेंगे और प्राथमिक शिक्षा के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा।
संघ ने आरोप लगाया है कि इस अधिसूचना के माध्यम से प्रदेश के हजारों एचटी, सीएचटी और बीईईओ की प्रशासनिक शक्तियां छीनकर उनके कार्यक्षेत्र को सीमित किया गया है, ताकि भविष्य में इन पदों को समाप्त किया जा सके।
संघ के अनुसार नई व्यवस्था के तहत 15 से 20 स्कूलों का एक परिसर बनाकर समस्त प्रशासनिक नियंत्रण और संचालन का दायित्व प्रिंसिपल को सौंप दिया गया है। इससे जहां प्रिंसिपलों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ेगा, वहीं प्राथमिक शिक्षा हाशिए पर चली जाएगी। संघ ने इसे प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर सीधा प्रहार बताया है।
प्राथमिक शिक्षक संघ ने 5 अक्टूबर, 2025 को प्रदेश के सभी उपमंडलों में रोष प्रदर्शन किए थे। संबंधित एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और उच्च अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन अब तक न तो किसी पत्र का जवाब मिला और न ही संघ को वार्ता के लिए बुलाया गया।
85 संघ के प्रतिनिधिमंडल विभिन्न विधायकों व मंत्रियों से कई बार मिल चुके हैं। राज्य कार्यकारिणी भी पिछले तीन महीनों में मुख्यमंत्री से सात बार मिल चुकी है। हर बार वार्ता का आश्वासन मिला, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
संघ का आरोप है कि सीबीएसई स्कूल बनाते समय अन्य वर्गों के पद बनाए रखे गए, लेकिन सीएचटी के पद समाप्त कर दिए गए। करीब 3,000 जेबीटी से एचटी पदों पर होने वाली पदोन्नति पर भी रोक लगाने की तैयारी है। इसके अलावा 4,500 से अधिक जेबीटी पद रिक्त पड़े हैं, जिन्हें भरा नहीं जा रहा है। 6,200 से अधिक नर्सरी टीचर्स और इतने ही आया के पद खाली चल रहे हैं।
संघ का कहना है कि इससे न केवल प्रशिक्षित बेरोजगारों के साथ अन्याय हो रहा है, बल्कि प्राथमिक शिक्षा की जड़ें भी कमजोर हो रही हैं। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि मिड डे मील वर्कर्स की नौकरियां भी इस अधिसूचना से खतरे में पड़ सकती हैं। वहीं, संघ पदाधिकारियों को झूठे पुलिस मुकदमों में फंसाने और विभागीय जांच के नाम पर प्रताड़ित करने के आरोप भी लगाए गए हैं।