साल 2025 खत्म होने से पहले दिसंबर में पांच दिन तक चलने वाले पंचक की शुरुआत होने जा रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दौरान कुछ खास काम वर्जित माने जाते हैं। हालांकि, इस दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जप और दान-पुण्य जैसे कार्य बहुत फलदायी होते हैं।
पंचक को ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व दिया गया है। जब चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं तब से पंचक की शुरुआत होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्र देव के कुंभ राशि में प्रवेश करते ही धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण का आरंभ हो जाता है।
इसके बाद चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र, पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और अंत में रेवती नक्षत्र से होकर आगे बढ़ते हैं। इन पांच नक्षत्रों से गुजरने में चंद्रमा को लगभग पांच दिनों का समय लगता है। चंद्रमा की इस पांच दिवसीय अवधि को ही पंचक कहा जाता है। पंचक को अशुभ समय माना जाता है और इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे कई शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
पंचांग के अनुसार, 24 दिसंबर 2025, बुधवार को शाम 7 बजकर 47 मिनट से पंचक की शुरुआत हो रही है। पंचक अगले पांच दिन के बाद यानी 29 दिसंबर 2025, सोमवार की सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगा। यह समय वर्ष के अंत में पड़ रहा है इसलिए इसका प्रभाव कई महत्वपूर्ण कार्यों पर पड़ सकता है।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पंचक के समय कार्य करने से अशुभ फल मिलता है। इस दौरान लकड़ी से जुड़े कार्य, चारपाई बनवाना, छत का निर्माण, दक्षिण दिशा की यात्रा और अंतिम संस्कार से संबंधित कुछ क्रियाएं पंचक में वर्जित मानी जाती हैं। मान्यता है कि पंचक में चारपाई बनवाने से रोग और मृत्यु का भय बढ़ता है, जबकि लकड़ी इकट्ठा करने से आर्थिक नुकसान हो सकता है।
पंचक में सभी शुभ कार्यों पर रोक नहीं होती है। इस दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जप, व्रत, दान-पुण्य और आत्मिक साधना को विशेष फलदायी माना गया है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पंचक के अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं।