ऋषि महाजन/नूरपुर। चिट्टे की खेप पकड़ने के बाद अब नूरपुर पुलिस ने उसके पीछे छिपी कमाई पर भी सीधा प्रहार किया है। इंदौरा थाना पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत एक मामले में 1 करोड़ 1 लाख 55 हजार 718 रुपये मूल्य की तीन संपत्तियों पर फ्रीजिंग और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है।
कार्रवाई के दायरे में दो कोठियां, फर्नीचर और घरेलू सामान के साथ एक कार शामिल है। ये संपत्तियां दलवीरो और उसके परिवार से जुड़ी बताई गई हैं।
पुलिस के अनुसार सबसे बड़ी संपत्ति दलवीरो और उसके परिवार की कोठी है, जिसकी आकलित कीमत 61 लाख 96 हजार 561 रुपये है। वहीं मिथुन उर्फ छप्पर की कोठी, फर्नीचर और घरेलू सामान की कीमत 32 लाख 60 हजार 950 रुपये, जबकि घरो देवी के नाम पंजीकृत कार का मूल्य 6 लाख 98 हजार 207 रुपये आंका गया है।
यह कार्रवाई एफआईआर संख्या 152/2017 में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68एफ(1) और 68ई के तहत की गई है।
मामले में छन्नी निवासी दलवीरो को 1 अप्रैल 2025 को दोषसिद्ध किया गया था। अदालत ने उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दलवीरो से जुड़े पांच और उसके पुत्र मिथुन उर्फ छप्पर से जुड़े 14 एनडीपीएस मामले दर्ज हैं।
खास बात यह है कि पुलिस अब सिर्फ नशे की खेप और आरोपियों तक सीमित नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड, आयकर संबंधी जानकारी, वाहन पंजीकरण और संपत्ति मूल्यांकन जैसे दस्तावेजों की भी पड़ताल की गई है।
यानी सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि चिट्टा कहां से आया और किसे बेचा गया? सवाल यह भी है कि चिट्टे से आया पैसा कहां गया और उससे क्या-क्या खरीदा गया?
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्मचंद वर्मा ने कहा है कि चिट्टे की कमाई से कोठियां, वाहन या दूसरी संपत्तियां खड़ी करने वालों तक भी पुलिस पहुंचेगी। हालांकि फ्रीजिंग कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी की पुष्टि के अधीन है और संबंधित व्यक्तियों को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का अधिकार है।