पालमपुर। हिमाचल प्रदेश में पशुधन विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, पशुपालन विभाग, पालमपुर के अंतर्गत बनूरी में स्थापित राज्य की पहली इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रयोगशाला ने उन्नत प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी के माध्यम से जर्सी नस्ल में तीव्र आनुवंशिक सुधार का सफल प्रदर्शन किया है।
यह आईवीएफ प्रयोगशाला भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DADF) द्वारा हिमाचल प्रदेश पशुधन एवं कुक्कुट विकास बोर्ड के माध्यम से वित्त पोषित की गई है। इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला का उद्घाटन जनवरी 2025 में हिमाचल प्रदेश सरकार के कृषि एवं पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार द्वारा किया गया।
आईवीएफ प्रक्रिया के अंतर्गत उच्च आनुवंशिक क्षमता वाली एमएसपी (न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल) दाता जर्सी गायों से अल्ट्रासाउंड-मार्गदर्शित सुइयों की सहायता से अंडाणुओं (ओओसाइट्स) का संग्रह किया जाता है। इन अंडाणुओं को प्रयोगशाला में परिपक्व किया जाता है तथा श्रेष्ठ आनुवंशिक क्षमता वाले सांडों के वीर्य से इन विट्रो निषेचन किया जाता है।
इसके पश्चात नियंत्रित परिस्थितियों में भ्रूणों का संवर्धन किया जाता है और तैयार भ्रूणों को स्वस्थ सरोगेट (प्रतिस्थापन) गायों में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस तकनीक से जन्मे बछड़े मूल दाता गाय की उत्कृष्ट आनुवंशिक विशेषताओं को धारण करते हैं, जिससे श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म का तीव्र विस्तार संभव होता है।
आईवीएफ तकनीक उत्कृष्ट डेयरी आनुवंशिकी का तीव्र गुणन, श्रेष्ठ नस्लों का संरक्षण एवं संवर्धन, तीव्र आनुवंशिक प्रगति, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, पशुपालकों की आय में सुधार क्षेत्रों में क्रांतिकारी भूमिका निभा रही हैं।
स्थापना के बाद से आईवीएफ लैब पालमपुर द्वारा निम्न कार्य सफलतापूर्वक किए गए हैं। लगभग 45 जर्सी एवं जर्सी क्रॉसब्रेड भ्रूणों का जेसबीएफ (JCBF) पशुओं तथा किसानों के पशुओं में स्थानांतरण (सरोगेशन)। क्षेत्र (फील्ड) में 10 गर्भधारण की पुष्टि। फार्म पशुओं में जर्सी भ्रूणों से 6 गर्भधारण की पुष्टि।
फार्म पशुओं में जर्सी क्रॉसब्रेड भ्रूणों से 2 गर्भधारण की पुष्टि। एक ही उत्कृष्ट गाय से तीन बछड़ों का जन्म हुआ है। आईवीएफ एवं सरोगेसी तकनीक के माध्यम से एक ही उत्कृष्ट जर्सी दाता गाय से एक वर्ष में तीन उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले बछड़ों का जन्म एक बड़ी उपलब्धि है।
पहला जर्सी एमएसपी नर बछड़ा राजपुर में डॉ. राजीव फुल्ल के फार्म पर जन्मा है। उसी दाता गाय से एक मादा बछड़ी का जन्म जर्सी कैटल ब्रीडिंग फार्म (JCBF), पालमपुर में हुआ। एक अन्य नर बछड़े का जन्म कंडबाड़ी में सरदार सिंह की सरोगेट गाय से हुआ।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि आईवीएफ तकनीक के माध्यम से एक ही उत्कृष्ट गाय से कम समय में अनेक संतानों का जन्म संभव है, जिससे आनुवंशिक सुधार की प्रक्रिया अत्यंत तेज हो जाती है। उल्लेखनीय है कि उक्त दाता गाय वर्तमान में एक श्रेष्ठ सांड के वीर्य से गर्भित है, जिससे भविष्य में और भी उच्च गुणवत्ता वाली संतानों की अपेक्षा है।
क्षेत्र में जन्मे नर बछड़ों को सभी आवश्यक रोग परीक्षण एवं औपचारिकताओं के पश्चात वापस खरीदा जाएगा। इन्हें पीटी जर्सी परियोजना एवं स्पर्म स्टेशन, पालमपुर को उपलब्ध कराया जाएगा। प्रारंभ में इन्हें स्पर्म स्टेशन में क्वारंटाइन रखा जाएगा तथा बाद में कंडबाड़ी में स्थापित होने वाले बछड़ा पालन केंद्र में स्थानांतरित किया जाएगा।
क्षेत्र में जन्मी मादा बछियों को जेसबीएफ पालमपुर में नस्ल सुधार हेतु सम्मिलित किया जाएगा। भविष्य में इन सांडों की संतानों से जन्मी गायें प्रतिदिन 30 लीटर से अधिक दूध उत्पादन की क्षमता रख सकती हैं, जो प्रदेश की दुग्ध उत्पादकता में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। पालमपुर में आईवीएफ तकनीक का सफल क्रियान्वयन प्रदेश को उत्कृष्ट डेयरी जर्मप्लाज्म के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह पहल तेज आनुवंशिक प्रगति एवं श्रेष्ठ जर्सी नस्ल के व्यवस्थित विस्तार के माध्यम से राज्य में डेयरी विकास को नई दिशा दे रही है। यह परियोजना जैव-प्रौद्योगिकी को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने का एक आदर्श उदाहरण है, जिससे संस्थागत फार्मों के साथ-साथ प्रगतिशील पशुपालकों को भी सीधा लाभ मिल रहा है।