रेखा चंदेल/झंडूता। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर ने संस्कृति भवन बिलासपुर में साहित्यकार/ कलाकार से मिलिए कार्यक्रम के अंतर्गत मासिक गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
वहीं, संदेश शर्मा द्वारा मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की। मंच का संचालन इन्द्र सिंह चंदेल द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल द्वारा की गई। कार्यक्रम का आयोजन दो सत्रों में किया गया।
प्रथम सत्र में साहित्यकार रचना चंदेल व डॉ. जयचंद महलवाल का जीवन वृतांत पढ़ा गया। कार्यक्रम में डॉ जय चंद महलवाल व रचना चंदेल को उनके साहित्यिक सृजन के लिए डायरी, पैन, मफलर, टोपी देकर सम्मानित किया गया।
दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें रविन्द्र भट्टा द्वारा 'चिट्टे के खिलाफ हिमाचल ने कर दिया आगाज', रविन्द्र कुमार शर्मा ने पहाड़ी रचना 'आया केहड़ा जमाना लोको इक्क नवीं बमारी आयादी', शीला सिंह ने 'प्रेम धर्म की सीखा है, धर्म नहीं अपराध', रविंदर शर्मा ने 'आई-गई लोहड़ी कणक सिल्लों से कणक निसरने लग पड़ी' की प्रस्तुति दी।
सुशील पुंडीर ने 'पिछला साल चला गया, आ गया न्या साल', कर्मवीर कंडेरा ने 'एक शेर सा खामोशी का भी रहता है', डॉ. हेमा देवी ठाकुर ने 'महफिल' रचना से अपनी प्रस्तुति दी। संदेश शर्मा द्वारा 'धौलरा राजा' पर अपनी प्रस्तुति दी। डॉ. अनेक राम सांख्यान ने 'चिट्टे' पर कविता गायन प्रस्तुत की।
शिवपाल गर्ग ने 'है ये जिंदगी अब वे मजा मुझे लग रहा है आजकलट, अरुण डोगरा ने 'मां पापा के बाद जिंदगी सी चल तो रही है पर अब जी नहीं रही', सुनील शर्मा ने 'देखो हूं जमाना बदली गया', केशव शर्मा ने "जिंदगी हर रोज एक नया सबक सिखाती रही", बृजलाल लखनपाल ने पहाड़ी गीत " बदली गया, बदली गया तेरा गांव जिंदड़िये बदली गया" गाया।
एसआर आज़ाद ने "मेघा गरजे भरखा बरसे चमके कहां बिजुरिया रे", राम पाल डोगरा "आया बसंत पाला उड़ंत", जीत राम सुमन ने "बीत गया जो वर्ष अभी" शीर्षक से रचना प्रस्तुत की।
डॉ. जय चंद महलवाल ने "चिट्टे रे नशे लोक जीउन्दे ई मुकाए, भंगे लोक भंगी बनाए", रचना चंदेल ने "मेरा नि:स्वार्थ समर्पण मेरे संस्कार है मजबूरी नहीं",सुरेन्द्र मिंहास ने "क्या कभी शहर पे नूर आएगा, क्या फिर मेरा शहर मेरा खिल- खिलाएगा" कविता प्रस्तुत की। चिंता देवी द्वारा बिलासपुर की मशहूर की शानदार प्रस्तुतियां दी।
अंत में जिला भाषा अधिकारी ने अपने संबोधन में सभी साहित्यिकारों का आभार प्रकट करते हुए अवगत करवाया कि साहित्यकारों/ कलाकारों को विभाग इसी तरह उनके साहित्य/ कला के क्षेत्र में दिए गए सराहनीय योगदान के लिए सम्मानित करने की श्रृंखला जारी रखेगा तथा नवोदित साहित्यकारों/ कलाकारों को मंच मिल सके ऐसा प्रयास विभाग का रहता है। इसके साथ ही विभागीय परियोजनाओं की जानकारी भी साहित्यकारों को दी गई।