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नूरपुर में विकास अब भी फाइलों में कैद : पार्क बदहाल, पार्किंग का हल नहीं, कूड़ा व्यवस्था फेल

ewn24 news choice of himachal 07 May,2026 6:16 pm


    ऋषि महाजन/नूरपुर। पांच साल का कार्यकाल खत्म होते ही एक बार फिर नगर परिषद चुनाव सिर पर आ खड़े हुए हैं और इसके साथ ही विकास के बड़े-बड़े दावे भी तेज हो गए हैं। लेकिन हकीकत यह है कि पूरे कार्यकाल के दौरान नूरपुर शहर की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी रहीं।

    शहर के पार्क आज भी बदहाली का शिकार हैं। न तो उनका सौंदर्यीकरण हो पाया और न ही लोगों के बैठने और घूमने के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जा सकीं। वहीं, पार्किंग की समस्या भी लगातार गंभीर बनी रही। ट्रैफिक समस्या जस की तस रही ।कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन वे फाइलों से बाहर नहीं निकल सकीं।

    कूड़ा-कर्कट की समस्या भी नगर परिषद के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। घर-घर कूड़ा उठाने की योजना को बड़े स्तर पर प्रचारित किया गया, लेकिन यह योजना पूरी तरह सफल नहीं हो पाई। शहर के कई इलाकों में आज भी कूड़े के ढेर आम दृश्य बन चुके हैं, जिससे लोगों में नाराजगी साफ देखी जा सकती है।

    शहर की गलियां और सड़कों की हालत भी लंबे समय तक खराब बनी रही। हालांकि, कार्यकाल के आखिरी महीनों में मुख्य सड़क का जीर्णोद्धार जरूर किया गया, जिसे अब परिषद अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि पांच साल में सिर्फ एक काम को उपलब्धि बताकर क्या बाकी कमियों को नजरअंदाज किया जा सकता है?

    सबसे बड़ी बात यह रही कि परिषद अपने पूरे कार्यकाल में न तो कोई ठोस बजट तैयार कर पाई और न ही शहर के समग्र विकास के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप बना सकी। नतीजा यह रहा कि विकास योजनाएं कागजों तक ही सीमित रहीं।

    अब जब चुनाव फिर से सामने हैं, तो जनता को एक बार फिर नए वादों और योजनाओं का ‘लॉलीपॉप’ दिया जा रहा है। लेकिन इस बार शहर की जनता भी पिछले पांच साल का हिसाब मांगने के मूड में नजर आ रही है। आने वाले चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता वादों पर भरोसा करती है या काम के आधार पर फैसला सुनाती है।



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