Breaking News

  • कांगड़ा में भारी बारिश का रेड अलर्ट : 20 और 21 जुलाई को सभी शिक्षण संस्थान व आंगनबाड़ी केंद्र बंद
  • हॉकी हिमाचल की AGM में अहम फैसले : चार जिलों को सौंपी गई राज्य चैंपियनशिप की मेजबानी
  • जानें पंज बड़ वाले बाबा बाजी साहिब जी का गौरवशाली इतिहास : गुरु नानक देव जी के थे वंशज
  • बिलासपुर में उमड़ा 2500 से अधिक शिक्षकों का जनसैलाब, 26 जुलाई को शिमला में महाप्रदर्शन
  • बिलासपुर : सिक्योरिटी गार्ड और सुपरवाइजर की फिर आई भर्ती, 22 और 23 जुलाई को इंटरव्यू
  • दुनिया भर में फेसबुक-इंस्टाग्राम ठप : लॉगिन करने में हजारों यूजर्स को हो रही है परेशानी
  • नूरपुर : जिला स्तरीय नागनी माता मेले का भव्य शुभारंभ : शोभायात्रा में पहुंचे डीसी कांगड़ा
  • HPBOSE 10th Result : पुनर्मूल्यांकन और पुनर्निरीक्षण का परिणाम जारी, ऐसे करें चेक
  • कैंसर से हारीं HPCU कर्मचारी रमन देवी, अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए भावुक अपील
  • हिमाचल में रेड अलर्ट : 20 और 21 जुलाई को भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी, रहें सावधान

नूरपुर में विकास अब भी फाइलों में कैद : पार्क बदहाल, पार्किंग का हल नहीं, कूड़ा व्यवस्था फेल

ewn24 news choice of himachal 07 May,2026 6:16 pm


    ऋषि महाजन/नूरपुर। पांच साल का कार्यकाल खत्म होते ही एक बार फिर नगर परिषद चुनाव सिर पर आ खड़े हुए हैं और इसके साथ ही विकास के बड़े-बड़े दावे भी तेज हो गए हैं। लेकिन हकीकत यह है कि पूरे कार्यकाल के दौरान नूरपुर शहर की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी रहीं।

    शहर के पार्क आज भी बदहाली का शिकार हैं। न तो उनका सौंदर्यीकरण हो पाया और न ही लोगों के बैठने और घूमने के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जा सकीं। वहीं, पार्किंग की समस्या भी लगातार गंभीर बनी रही। ट्रैफिक समस्या जस की तस रही ।कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन वे फाइलों से बाहर नहीं निकल सकीं।

    कूड़ा-कर्कट की समस्या भी नगर परिषद के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। घर-घर कूड़ा उठाने की योजना को बड़े स्तर पर प्रचारित किया गया, लेकिन यह योजना पूरी तरह सफल नहीं हो पाई। शहर के कई इलाकों में आज भी कूड़े के ढेर आम दृश्य बन चुके हैं, जिससे लोगों में नाराजगी साफ देखी जा सकती है।

    शहर की गलियां और सड़कों की हालत भी लंबे समय तक खराब बनी रही। हालांकि, कार्यकाल के आखिरी महीनों में मुख्य सड़क का जीर्णोद्धार जरूर किया गया, जिसे अब परिषद अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि पांच साल में सिर्फ एक काम को उपलब्धि बताकर क्या बाकी कमियों को नजरअंदाज किया जा सकता है?

    सबसे बड़ी बात यह रही कि परिषद अपने पूरे कार्यकाल में न तो कोई ठोस बजट तैयार कर पाई और न ही शहर के समग्र विकास के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप बना सकी। नतीजा यह रहा कि विकास योजनाएं कागजों तक ही सीमित रहीं।

    अब जब चुनाव फिर से सामने हैं, तो जनता को एक बार फिर नए वादों और योजनाओं का ‘लॉलीपॉप’ दिया जा रहा है। लेकिन इस बार शहर की जनता भी पिछले पांच साल का हिसाब मांगने के मूड में नजर आ रही है। आने वाले चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता वादों पर भरोसा करती है या काम के आधार पर फैसला सुनाती है।



    हिमाचल और देश दुनिया से जुड़ी हर बड़ी अपडेट पाएं अपने फोन पर, जुड़े WhatsApp ग्रुप के साथ 



    मंडी : तेज रफ्तार ने ले ली तीन युवकों की जान, दो एम्स में लड़ रहे जिंदगी की जंग  



    हिमाचल में SET-2026 की तिथि घोषित, इस दिन होनी प्रस्तावित 



    HPBOSE 12TH Result : मेरिट में छाए सरकारी स्कूल, साइंस में बुरी तरह पिछड़े













Himachal Latest

Live video

Jobs/Career

Trending News

  • Crime

  • Accident

  • Politics

  • Education

  • Exam

  • Weather