बरसात के मौसम में कंजंक्टिवाइटिस (Eye Flu) आंखों में होने वाला एक बेहद आम संक्रमण है। यह मुख्य रूप से बैक्टीरिया या वायरस के कारण होता है। वातावरण में अत्यधिक नमी और नमी के कारण रोगाणुओं के तेजी से पनपने से यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैलता है।
आज हम इसी के बारे में बात करेंगे कि इसके क्या लक्षण हैं और कैसे बचाव किया जा सकता है साथ ही आईवन विज़न सेंटर (Eyeone Vision Centre) कांगड़ा की मेडिकल डायरेक्टर और चीफ आई सर्जन डॉ. गीतांजलि सरकेक से जानेंगे कंजंक्टिवाइटिस (Eye Flu) से किस तरह बचाव किया जा सकता है।
आंखों का अत्यधिक लाल होना या सूजन आना।
आंखों से लगातार पानी या चिपचिपा पदार्थ निकलना।
आंखों में चुभन, खुजली और जलन महसूस होना।
आईवन विज़न सेंटर (Eyeone Vision Centre) कांगड़ा की मेडिकल डायरेक्टर और चीफ आई सर्जन डॉ. गीतांजलि सरकेक के अनुसार, लोगों में यह आम धारणा है कि आई फ्लू होने पर बार-बार ठंडे या नल के पानी से आंखें धोने से संक्रमण ठीक हो जाता है। हालांकि, यह तरीका आंखों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
डॉ. सरकेक ने स्पष्ट किया कि -
दूषित पानी का खतरा: साधारण नल के पानी में कई सूक्ष्म बैक्टीरिया और अशुद्धियां हो सकती हैं। जब आप संक्रमित आंख पर पानी के छींटे मारते हैं, तो ये बैक्टीरिया आंख के कॉर्निया में प्रवेश कर सेकेंडरी इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं।
प्राकृतिक सुरक्षा परत का बहना: बार-बार पानी डालने से आंखों की प्राकृतिक आंसू फिल्म (Tear Film) बह जाती है, जिससे आंखें अधिक सूखी (Dry Eyes) और संवेदनशील हो जाती हैं। इससे जलन और चुभन और बढ़ सकती है।
आई ड्रॉप्स का सही उपयोग: बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से कोई भी आई ड्रॉप या एंटीबायोटिक न डालें। आई विशेषज्ञ द्वारा सुझाई गई आई ड्रॉप्स का ही नियमपूर्वक इस्तेमाल करें।
सफाई का तरीका: आंखों को साफ करने के लिए उबले हुए पानी को ठंडा करके, रुई (Cotton Swab) की मदद से आंखों के बाहरी किनारे को हल्के हाथ से पोंछें।
व्यक्तिगत स्वच्छता: अपने तौलिए, रुमाल, तकिये और चश्मे को किसी अन्य व्यक्ति के साथ शेयर न करें। बार-बार हाथों को साबुन से धोएं और आंखों को छूने से बचें।
पता: HDFC बैंक के सामने, VPO- घुरकड़ी, मटौर-पालमपुर रोड, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
संपर्क सूत्र: 78070-33673, 98058-73673
ईमेल: contact@eyeonecentre.com