ऋषि महाजन/नूरपुर। विधानसभा क्षेत्र नूरपुर की ग्राम पंचायत खैरियां के वटनियाल वार्ड स्थित बरोट उर्फ चूहक गांव से लोकतंत्र को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। जहां पूरे प्रदेश में पंचायती राज चुनावों को लेकर चुनावी सरगर्मियां चरम पर हैं, वहीं इस गांव के लोगों ने विकास से मोहभंग होने के बाद चुनावों के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।
करीब 150 से अधिक आबादी वाले इस गांव के ग्रामीणों ने एकजुट होकर साफ कर दिया है कि जब तक गांव को सड़क सुविधा नहीं मिलेगी, तब तक गांव का कोई भी व्यक्ति मतदान नहीं करेगा। गांव में सोमवार को “सड़क नहीं तो वोट नहीं” के नारे गूंजते रहे और लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया।
ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्ष 1985 से गांव तक सड़क पहुंचाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन चार दशक बीत जाने के बावजूद आज तक सड़क का सपना अधूरा है। गांव के लोगों का कहना है कि आज भी उन्हें कच्चे, उबड़-खाबड़ रास्तों, कीचड़ और खड्डों के सहारे आवाजाही करनी पड़ती है। बरसात के दिनों में हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि गांव का संपर्क लगभग टूट जाता है।
ग्रामीणों ने कहा कि बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता, जबकि स्कूली बच्चों को रोज जोखिम भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गांववासियों ने नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। उनका कहना था कि हर चुनाव से पहले नेता गांव पहुंचकर सड़क, विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव उनकी प्राथमिकताओं से गायब हो जाता है।
ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब वे झूठे आश्वासनों और खोखली घोषणाओं से तंग आ चुके हैं। उनका साफ कहना है कि “अबकी बार वोट नहीं डालेंगे, जब तक सड़क नहीं बनेगी तब तक चुनावों से दूरी रहेगी।”
इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि अब भी उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले विधानसभा चुनावों का भी बहिष्कार किया जाएगा।
उधर, इस मामले में जब एसडीएम नूरपुर अरुण शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में बीडीओ नूरपुर को अवगत करवाया जाएगा और जल्द ही एक टीम गांव भेजकर लोगों की समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
एसडीएम ने लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि मतदान प्रत्येक नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है, इसलिए चुनावों का बहिष्कार करना उचित नहीं है। उन्होंने सभी लोगों से अपने मत का सही प्रयोग करने की अपील की।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर 40 वर्षों तक एक गांव सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से क्यों वंचित रहा? क्या इस बार प्रशासन ग्रामीणों की नाराजगी को गंभीरता से लेगा या फिर चुनावी वादे एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाएंगे।