देहरा। लावारिस पशुओं की तादाद बढ़ती जा रही है। सड़कों पर पशु घूमते देखे जा। सकते हैं। पशु फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इस समस्या के लिए कहीं न कहीं लोग खुद दोषी हैं। कई लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने के बाद इन पशुओं को भूखे प्यासे सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देते हैं। हालांकि गौशालाएं बनी हैं, लेकिन लोग कोसते नजर आ जाएंगे पर लावारिस पशुओं को गौशाला तक छोड़ने की जहमत नहीं उठाएंगे।
वहीं, इससे हटकर कांगड़ा जिला के देहरा विकासखंड के खबली गांव के कुछ लोग अपने बूते नेक कार्य कर रहे हैं। लोग पशुओं को पकड़ कर गौशाला छोड़ने का काम कर रहे हैं। इसके कारण किसानों को तो राहत मिलती है, पशुओं को भी आसरा मिलता है। पशुओं को गौशाला छोड़ने की बाकायदा एसडीएम से अनुमति ली जाती है। लोग जब पशुओं को पकड़ते हैं तो उनके चारे और पानी का पूरा प्रबंध किया जाता है।
बता दें कि खबली की समाजसेविका शोभा देवी ने पशुओं से संबंधित मुद्दा उठाया था। सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई कि पशुओं की सुध ली जाए। पशु यहां बांधे गए हैं और इनको कोई घास व पानी नहीं दिया जा रहा।
हमने जब गांव वालों से इस बारे में बात की तो उन्होंने इस इल्जाम को सिरे से नकारा और कहा कि वे लगातार इन पशुओं को घास व पानी दे रहे हैं। यहीं नहीं उन्होंने प्रशासन से भी इस बारे में परमिशन ली है और पशुओं को अपने खर्च पर सुधांगल (लुथान) स्थित गौ सदन में पहुंचाया जा रहा है।
गांव वालों में सुरिंदर कुमार ने कहा कि हम घास पानी सब दे रहे हैं। हम लोगों पर गलत इल्जाम लगाए जा रहे हैं। आगर चंद ने बताया कि हर साल वे लोग 70-80 पशुओं को पकड़ते हैं। फसलें हर बार खराब होती हैं जिससे किसानों को काफी नुकसान होता है।
हम कड़ी मेहनत से इन पशुओं को पकड़ते हैं उसके बाद अपने खर्च पर इन्हे गौशाला भेजते हैं। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि हमारी आर्थिक या किसी भी तरह की मदद के लिए लोग आगे नहीं आते लेकिन हम पर गलत इल्जाम लगाए जा रहे हैं जो कि गलत है।