रेखा चंदेल/झंडूता। पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बरमाना में कार्यशाला का आयोजन किया गया। स्कूल में पढ़ रहे बच्चों से नशे पर परिचर्चा की गई। क्या कारण है कि बच्चों का भी प्रतिदिन नशों के प्रति रुझान बढ़ता ही जा रहा है। बच्चे स्वयं ही अपने आने वाले भविष्य को भी खराब कर रहे हैं। बच्चों में नशे लक्षणों से ही पता चलता है।
अकेलापन, खुद को कमरे मे बंद रखना, कम भोजन खाना, गुस्सा, चिड़चिड़ापन, बातचीत की कमी, संबंधों में कमी, आंखें भी चढ़ी-चढ़ी रहती है । कारण बच्चों का अकेलापन, आसानी से मिलने वाली सुविधाएं, अवसाद, देखा देखी का प्रचलन, बच्चे भी नशे में ग्रसित होकर अपना ही नहीं अपने परिवार और आसपास के वातावरण को खराब कर रहे हैं।
बच्चे भी अपने सहपाठियों को अपने साथ गिरफ्त में लेने की कोशिश कर रहे हैं। नशे से ग्रस्त बच्चों को भी नियंत्रित करने में अभिभावक भी अक्षम हो चुके हैं। समाज के लिए भी एक चिंतनीय विषय है। जीवन की भागदौड़ के कारण अभिभावकों का नियंत्रण भी बच्चों पर कम हो चुका।
मुख्य वक्ता डॉक्टर राजकुमारी साइकोलॉजिस्ट ने जानकारी प्रदान की नशा एक सामाजिक विकार के रूप में सामाजिक व्याधिकी बन उभर रहा है । नशे से गिरफ्त बच्चों को बाहर निकलने का दायित्व समाज में रहने वाले बुद्धिजीवियों की सहभागिता पर भी आ चुका है । नशा यदि इस तरह विकराल रूप से फैलता रहा । सबके लिए समस्या का समाधान करना भी चुनौती बन जायेगा ।
कहीं ना कहीं कमी बच्चों के संस्कारों में भी आ रही है। बच्चे भी संस्कारों को भूलती जा रहे है । बच्चों में सहनशीलता, धैर्य, आत्म नियंत्रण और अनुशासन की भी कमी भी पाई जा रही है । बच्चों के साथ साथ माता पिता में भी जागरूकता का अभाव पाया जा रहा है। एक मंच अभिभावकों को भी अपने विचार साझा करने के लिए मिलना चाहिए ।
जहाँ पर माता-पिता और अभिवावक भी अपनी जानकारियों को साँझा कर सके । समस्या के समाधान में, अभिवावक, बुद्धिजीवी वर्ग, शिक्षक वर्ग, युवा पीढ़ी, साइकोलॉजिस्ट की सहभागिता से सुनिश्चित हो सकता है । आवश्यकता सभी को एक पहल करनी है । असम्भव नहीं है । युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकलना भी संभव हो सकता है ।
डॉ राजकुमारी साइकोलॉजिस्ट ने युवाओं से भी आग्रह किया । समय-समय पर आप भी नशे से ग्रसित बच्चों, दोस्त, मित्रों को काउंसलिंग के लिए साइकोलॉजिस्ट के पास परामर्श के लिए ले जाए । युवा खुद भी नशा ना करे। अपना बचाव युवा खुद भी आत्म नियंत्रण से कर सकते हैं।
परामर्श के माध्यम से भी युवाओं को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा सके । परिवार भी बर्बादी की तरफ जा रहे हैं। नशे का प्रभाव आस पास के वातावरण पर भी हो रहा है । बच्चे नशे और आने वाली पीढ़ी को भी को बर्बाद कर रहा है ।
डॉ राज कुमारी साइकोलॉजिस्ट ने अपना कैसे बचाव कर सकते हैं। चकाचौंध जीवन शैली, दिखावा, तनाव, विसंगति, सिमित संसाधनों के अभाव में भी बच्चे नशे की और आकर्षित हो रहे। बच्चों के साथ साथ माता-पिता में जागरूकता का होना भी बहुत जरूरी है ।
पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला महाविद्यालय बरमाना की प्रिंसिपल मति नीलम, शिक्षक वर्ग, स्टाफ के सदस्य कार्यशाला के दौरान उपस्थिति रहे।