शिमला। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला की तहसील नालागढ़ के रख घनसोत के बंगाला जाति से संबंधित लोगों को अभी राहत मिलती नहीं दिख रही है। जटिलताओं के चलते अभी बंगाला जाति को अनुसूचित जाति में सम्मिलित करने का सरकार का कोई विचार नहीं है।
यह जानकारी हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में नालागढ़ के विधायक हरदीप सिंह बावा के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. कर्नल धनी राम शांडिल ने मुहैया करवाई है।
जानकारी दी है कि गांव रख घनसोत, तहसील नालागढ़, जिला सोलन के अनुसूचित जाति समुदाय के अनेक पात्र व्यक्तियों को राजस्व अभिलेखों में उनकी जाति बंगाली के स्थान पर बंगाला दर्ज होने के कारण अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं।
सरकार द्वारा कुल 56 जातियों/उप जातियों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में अनुसूचित किया गया है। श्रेणी में क्रम संख्या 5 में में बंगाली जाति दर्ज है। बंगाला जाति को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र तब तक जारी नहीं किया जा सकता जब तक कि संवैधानिक प्रकिया के माध्यम से इसे विशेष रूप से इस सूची में शामिल न किया जाए।
उपायुक्त सोलन द्वारा बंगाली एंव बंगाला जाति की समानता या असमानता बारे मागदर्शन मांगा गया था जिस पर उन्हें अवगत करवाया गया कि अनुसूचित जाति की सूचि में क्रम संख्या 5 पर बंगाली जाति दर्ज है। अतः संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से बंगाला जाति को उपरोक्त सूचि में शामिल किए बिना इन्हें अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जा सकता है।
अनुसूचित जाति की सूची में संशोधन की कार्यप्रणाली को 15 जून 1999 को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अल्पसंख्यक संबंधी केन्द्रीय मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा अनुमोदित किया गया था।
इस कार्यप्रणाली के अनुसार, अनुसूचित जाति की सूची में किसी जाति को शामिल करने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल है और इसके लिए संसद के दोनों सदनों के अनुमोदन की आवश्यकता होती है। अतः सरकार अभी बंगाला जाति को अनुसूचित जाति में सम्मिलित करने का विचार नहीं रखती है।