नगरोटा बगवां। बाली एक ऐसा आभूषण है जो महिला और पुरुष दोनों के बीच बेहद लोकप्रिय है और कानों की शोभा बढ़ाता है। लेकिन क्या आपने कभी सुना या देखा है कि किसी मछली को बाली पहनाई जाती है?
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां मन्नत पूरी होने पर मछलियों को सोने-चांदी की बाली (बालू) पहनाने की अनूठी परंपरा है।
कांगड़ा जिला के नगरोटा बगवां के अंतर्गत आने वाले श्री मच्छिन्द्र नाथ मंदिर मूमता में यह अनूठी रस्म सदियों से निभाई जा रही है। हाल ही में कांगड़ा शहर की रहने वाली एक युवती ने अपनी मन्नत पूरी होने पर इस परंपरा को निभाया है।
कांगड़ा निवासी आंचल मेहरा ने मन्नत मांगी थी कि यदि उनका चयन 'नursing officer' के पद पर हो जाता है, तो वह बाबा मच्छिन्द्र नाथ के दर पर आकर मछली को सोने की बाली पहनाएंगी। आंचल का चयन नर्सिंग ऑफिसर के रूप में हो गया और वह पिछले 6 महीनों से एम्स (AIIMS) बठिंडा में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
अपनी इसी मन्नत को पूरा करने के लिए आंचल मेहरा हाल ही में अपने परिवार के साथ श्री मच्छिन्द्र नाथ मंदिर मूमता पहुंचीं और एक मछली को सोने की बाली पहनाई।
इस अनोखी रस्म को पूरा करने के लिए स्थानीय निवासियों की मदद ली जाती है। सबसे पहले स्थानीय ग्रामीण द्वारा जाल की मदद से तालाब से एक मछली को पकड़ा जाता है। इसके बाद पूरे विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ मछली को सोने की बाली पहनाई जाती है। रस्म पूरी होते ही मछली को वापस पानी में सुरक्षित छोड़ दिया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान इस बात का विशेष और कड़ा ध्यान रखा जाता है कि मछली को किसी भी प्रकार का शारीरिक कष्ट या चोट न पहुंचे। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर में जो भी श्रद्धालु अपनी सच्ची श्रद्धा से मन्नत मांगता है, वह जरूर पूरी होती है और आभार जताने के लिए लोग इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनते हैं।