ऋषि महाजन/नूरपुर। कहते हैं कि प्यार न भाषा देखता है, न सरहदें और न ही दूरियां। इसका जीवंत उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब जिला कांगड़ा के उपमंडल जवाली की ग्राम पंचायत अमलेला के युवक रजत के प्यार में पड़कर वियतनाम की युवती हजारों किलोमीटर का सफर तय कर हिमाचल पहुंच गई।
दोनों ने श्री नृसिंह मंदिर, ठाकरां (फतेहपुर) में हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सात फेरे लेकर हमेशा के लिए एक-दूसरे का हाथ थाम लिया।
दूल्हे रजत ने बताया कि दोनों की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। बातचीत का सिलसिला धीरे-धीरे दोस्ती और फिर गहरे प्रेम में बदल गया। जब दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया तो परिवारों ने भी खुशी-खुशी उनकी इच्छा को स्वीकार कर लिया।
रजत ने बताया कि वह अपनी होने वाली दुल्हन को लेने दिल्ली गया था, जहां से दोनों फतेहपुर पहुंचे और मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न किया। उन्होंने कहा कि फिलहाल भाषा अलग है, लेकिन प्यार सबसे बड़ी भाषा है और समय के साथ दोनों एक-दूसरे की भाषा भी सीख जाएंगे।
नवविवाहिता ने भी हिंदू परंपरा के अनुसार हुई शादी पर खुशी जताते हुए कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद खास और यादगार रहेगा।
दूल्हे के पिता सरताज सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों ने नवदंपति को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद और सफल वैवाहिक जीवन की कामना की। विवाह समारोह में पंडित योगराज शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विवाह संस्कार संपन्न करवाया।
एक ओर हिमाचल का छोटा-सा गांव अमलेला, दूसरी ओर हजारों किलोमीटर दूर वियतनाम। न भाषा एक, न संस्कृति, न खान-पान। लेकिन सोशल मीडिया पर शुरू हुई एक साधारण-सी बातचीत ने ऐसा रिश्ता बनाया कि सात समंदर की दूरियां भी छोटी पड़ गईं।
वियतनाम की युवती ने अपना देश छोड़कर भारतीय संस्कृति को अपनाया और फतेहपुर के मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लेकर हमेशा के लिए हिमाचल की बहू बन गई।
यह शादी सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि दो देशों, दो संस्कृतियों और दो परिवारों के खूबसूरत संगम की मिसाल बन गई। सच ही कहा गया है—जब प्यार सच्चा हो, तो दूरियां और सरहदें भी रास्ता नहीं रोक पातीं।