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मंडी में बोले जस्टिस सूर्यकांत, न्यायिक परिसरों को अस्पतालों की तरह काम करने की जरूरत

ewn24 news choice of himachal 15 Mar,2026 5:56 pm



    लोग न्यायालय में राहत की उम्मीद लेकर आते 



    मंडी।
    भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में आज 152 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मंडी ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास किया। यह अत्याधुनिक कोर्ट 9.6 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा। इसमें चार ब्लॉक होंगे, जजों के साथ-साथ वकीलों और लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। 

    इसके उपरांत, विधिक साक्षरता शिविर में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक परिसरों को अस्पतालों की तरह काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोग उम्मीद के साथ अस्पताल जाते हैं, जो भूमिका अस्पतालों की है, उसी सेवाभाव के साथ न्यायिक व्यवस्था को भी काम करना चाहिए। लोग न्यायालय में राहत की उम्मीद लेकर आते हैं।


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    उन्होंने कहा कि सुविधाएं बढ़ने के साथ न्यायिक व्यवस्था की ज़िम्मेदारी भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मंडी को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है और लोग श्रद्धाभाव के साथ यहां आते हैं। आज इसी स्थान पर न्याय के मंदिर की स्थापना हो रही है, जो जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा। 

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का हिमाचल प्रदेश आने पर स्वागत किया और उन्हें दोबारा प्रदेश में आने का न्यौता दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक न्याय और अपने अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित करना राज्य सरकार का संकल्प है। 


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    उन्होंने कहा कि हम संविधान की भावना के अनुरूप समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर नागरिक को समान अवसर प्राप्त हो और लोकतंत्र की जड़ें और अधिक मजबूत हों। 


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    सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने लगभग 6000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया है। इसके लिए देश का पहला कानून बनाया गया है। बेटियों की शादी की आयु को बढ़ाकर 21 वर्ष किया गया है, जिससे उन्हें लड़कों के समान अधिकार और अवसर मिल सकें। बेटियों को समान अधिकार देते हुए सरकार ने 150 बीघा तक की पैतृक संपत्ति में बेटियों को भी बराबर का अधिकार प्रदान किया है। 

    पहले यह अधिकार केवल बेटों तक सीमित था। विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत राज्य सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही है। राजस्व लोक अदालतों का आयोजन कर सरकार ने लगभग साढ़े पांच लाख लंबित मामलों का निपटारा किया है, जो कई वर्षों से लंबित पड़े थे।


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    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया ने कहा कि आज आयोजित जागरूकता शिविर का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित बनाना है। उन्होंने कहा कि न्याय केवल कोर्ट रूम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य अधिकारों के प्रति जागरूकता, क़ानूनी सहायता तक पहुंच के साथ-साथ समय पर सहायता उपलब्ध करवाना भी होना चाहिए, जैसा कि देश के मुख्य न्यायाधीश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने मौलिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं तो अधिकार बेमानी हो जाएंगे। 


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    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक ठाकुर ने कहा कि देश की आजादी के बाद मौलिक अधिकारों पर अधिक बल दिया गया। उन्होंने कहा कि हम अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करते हैं तो मौलिक अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों का कार्यक्रम में स्वागत किया।वहीं हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश संदीप शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। 




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