ऋषि महाजन/नूरपुर। नूरपुर के ऐतिहासिक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (छात्र) को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। प्रदेश सरकार ने स्कूल को दूसरे संस्थान में मर्ज करने का फैसला वापस ले लिया है और अब यह स्कूल फिर से शिक्षा बोर्ड के तहत संचालित होगा। इस फैसले के बाद शहर में राहत और खुशी का माहौल है।
पूर्व विधायक व वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय महाजन ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे शहर की जीत है और इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
अजय महाजन ने स्पष्ट किया कि वे इस फैसले का श्रेय नहीं लेना चाहते, लेकिन नूरपुर के हितों के लिए हमेशा मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों से लगातार इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाया गया और कई बार पत्राचार भी किया गया, जिसके बाद यह फैसला संभव हो पाया।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं, जबकि यह बच्चों के भविष्य और शहर की अस्मिता से जुड़ा विषय है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मुद्दे पर सियासत न करें।
स्कूल परिसर में आयोजित जन समारोह के दौरान महाजन ने जानकारी दी कि शिक्षा मंत्री ने दूरभाष पर उन्हें फैसले की सूचना दी है और जल्द ही स्कूल को दोबारा खोलने की अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद विद्यार्थियों के प्रवेश की प्रक्रिया भी शुरू होगी।
गौरतलब है कि पहले सरकार ने इस बॉयज स्कूल को सीबीएसई में शिफ्ट कर बीटीसी स्कूल में मर्ज कर दिया था, जिससे अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी रोष था। यह स्कूल करीब 150 वर्षों पुरानी ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा रहा है और कई प्रतिष्ठित हस्तियां यहां से शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं।
कार्यक्रम में वन निगम निदेशक योगेश महाजन (सुंदरी), वरिष्ठ कांग्रेस नेता यश पाल सोगा, स्कूल पेरेंट्स कमेटी के प्रधान राजेंद्र (गौरु), पार्षद गौरव महाजन सहित स्कूल की प्रधानाचार्य और स्टाफ मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में स्कूल प्रिंसिपल ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए जल्द अधिसूचना जारी करने की मांग की, ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो सके।
इस फैसले के बाद नूरपुर में अजय महाजन का राजनीतिक कद और प्रभाव बढ़ता नजर आ रहा है, जबकि अन्य दल अब भी इस मुद्दे पर बयानबाजी में लगे हुए हैं।