संगड़ाह। अगर इरादों में जान हो तो कोई भी जिम्मेदारी सपनों की राह का रोड़ा नहीं बन सकतीं। ये साबित कर दिखाया है सिरमौर जिला के संगड़ाह उपमंडल के टीकरी गांव की सीमा देवी ने।
बचपन में ही पिता को खो देने वाली सीमा के लिए शिक्षा की राह कभी आसान नहीं थी लेकिन उनकी माता के अटूट विश्वास ने उन्हें झुकने नहीं दिया। सीमा बचपन से ही मेधावी थीं। 12वीं कक्षा में अव्वल रहने पर उन्हें सरकारी सम्मान के तौर पर लैपटॉप भी मिला था।
अक्सर माना जाता है कि शादी के बाद एक महिला का करियर खत्म हो जाता है, लेकिन सीमा ने इस धारणा को बदल कर रख दिया है। साल 2018 में विवाह के रिश्ते में बंधने के बाद उन्होंने न केवल स्नातक की पढ़ाई पूरी की, बल्कि जेबीटी, बीएड और हिंदी विषय में एमए की डिग्रियां भी हासिल कीं।
दो नन्हे बच्चों की परवरिश और घर की व्यस्तता के बीच समय निकालकर उन्होंने खुद को यूजीसी नेट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए तैयार किया और अपने पहले ही प्रयास में इसे फतह कर लिया।
सीमा की इस जीत में उनके पति रामानंद जो पेशे से एक किसान हैं की भूमिका किसी ढाल की तरह रही। खेती-बाड़ी के काम के बीच उन्होंने सीमा के सपनों को कभी मुरझाने नहीं दिया। उनके प्रोत्साहन और सीमा के कुशल समय-प्रबंधन का ही परिणाम है कि आज पूरा सिरमौर इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।
सीमा देवी आज उन तमाम महिलाओं के लिए एक जीवंत उदाहरण बन गई हैं, जो शादी या बच्चों के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। उनकी यह कामयाबी संदेश देती है कि ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बावजूद, यदि मन में दृढ़ संकल्प हो तो सब कुछ संभव है।