कांगड़ा। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (टांडा) से एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर मामला सामने आया है।
कॉलेज प्रशासन ने गर्ल्स हॉस्टल में चल रहे नशे के खेल पर कड़ा प्रहार करते हुए एमबीबीएस (MBBS) तृतीय वर्ष की एक प्रशिक्षु (ट्रेनी) महिला डॉक्टर के कमरे से शराब की करीब 16 बोतलें बरामद की हैं। छापेमारी के दौरान उक्त छात्रा अपने कमरे में नशे की हालत में पूरी तरह बेसुध पाई गई।
टांडा मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) डॉ. मिलाप शर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें पिछले कुछ समय से लगातार गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं कि गर्ल्स हॉस्टल में कुछ छात्राएं नशे का सेवन कर रही हैं।
इन सूचनाओं के आधार पर जब हॉस्टल प्रबंधन और सुरक्षा टीम ने औचक निरीक्षण (चेकिंग) किया, तो तीसरे वर्ष की यह छात्रा अपने कमरे में अचेत (बेहोश) अवस्था में मिली। कमरे की तलाशी लेने पर वहां से भारी मात्रा में (लगभग 16 बोतलें) शराब बरामद हुई।
छात्रा की इस घोर अनुशासनहीनता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं। प्रशिक्षु महिला डॉक्टर को 1 महीने की अवधि के लिए कॉलेज और हॉस्टल से निष्कासित (Suspend) कर दिया गया है। वहीं, छात्रा पर 75,000 रुपए का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया है।
प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज जैसे गरिमामय संस्थान में प्रशिक्षु डॉक्टरों द्वारा किसी भी प्रकार का नशा कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अन्य छात्र-छात्राओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाने और एक कड़ा सबक देने के उद्देश्य से इस पूरी कार्रवाई और सजा की जानकारी कॉलेज के सभी आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स में सार्वजनिक कर दी गई है।
टांडा मेडिकल कॉलेज में नशे के खिलाफ छिड़ी यह मुहिम नई नहीं है। इससे पहले इसी महीने 5 जून को भी प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा के नेतृत्व में बॉयज हॉस्टल में औचक निरीक्षण किया गया था। उस समय भी 4 प्रशिक्षु डॉक्टरों (इंटरnative/ट्रेनी) को रंगे हाथों नशे की हालत में पकड़ा गया था।
प्रशासन ने उस वक्त भी सख्त कार्रवाई करते हुए चारों छात्रों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था और उन्हें एक महीने के लिए निष्कासित किया था।
प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा ने स्पष्ट किया कि कॉलेज परिसर या हॉस्टल में नशे में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी छात्र को बख्शा नहीं जाएगा। भविष्य में भी ऐसी औचक चेकिंग जारी रहेगी। छात्रों पर लगाया जा रहा यह आर्थिक दंड और निलंबन की कार्रवाई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और संस्थान के अन्य तय कड़े नियमों के अंतर्गत ही अमल में लाई जा रही है।