शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर प्रदेश सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
बुधवार को शिमला में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि सरकार कर्मचारियों के सम्मान और संवाद में विश्वास रखती है, लेकिन आम जनता को परेशान कर बस सेवाओं को बाधित करना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित चक्का जाम पूरी तरह से गैरकानूनी है। प्रदेश में आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून यानी एस्मा (ESMA) लागू है और यदि बस सेवाएं रोकी गईं, तो सरकार इसके प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी।
कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा, "यदि चालक और परिचालक बसें नहीं चलाना चाहते, तो वे बसों की चाबियां वापस कर दें।" उन्होंने साफ किया कि किसी भी कर्मचारी को कानून अपने हाथ में लेने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या यात्रियों को बीच रास्ते में उतारने की इजाजत नहीं होगी। स्थिति से निपटने के लिए गुरुवार से चालक और परिचालकों को उनके रूट संबंधी लिखित आदेश जारी किए जाएंगे।
उपमुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि सरकार बनने के बाद से एचआरटीसी कर्मियों को समय पर वेतन और पेंशन का भुगतान किया जा रहा है। सरकार एक महीने की भी डिफॉल्टर नहीं रही है। इसके अलावा कर्मचारियों को समय पर महंगाई भत्ता (DA) और पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ भी दिया जा रहा है।
निगम को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा देते हुए उन्होंने बताया कि निगम के बेड़े में 813 नई बसें शामिल की गई हैं, जिनमें 279 इलेक्ट्रिक बसें हैं। 2,198 कर्मचारियों को अनुबंध से नियमित किया गया है और 327 परिचालकों की नियमित भर्ती हुई है। 198 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी ओपीएस के दायरे में लाया गया है।
डिप्टी सीएम ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के साथ हुई बैठक में कर्मचारियों की ओर से कोई वित्तीय मांग नहीं रखी गई थी, बल्कि उनकी चर्चा का मुख्य विषय 'तबादले' थे। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन लगभग 2.5 करोड़ रुपये की कमाई करने वाले निगम को हड़ताल से जो भी नुकसान होगा, उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि एचआरटीसी चालक-परिचालक यूनियन का यह मामला अब हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय पहुंच चुका है, जिस पर गुरुवार को सुनवाई होनी है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार अब भी विवाद का समाधान बातचीत से ही चाहती है और इसके लिए वार्ता के दरवाजे हमेशा खुले हैं।