धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में अब तक प्रदेश भर में केवल 57 यूएमसी (Unfair Means Cases) दर्ज किए गए हैं, जो पिछले वर्ष के आंकड़ों के मुकाबले बोर्ड की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने स्पष्ट किया है कि तकनीक और सतर्कता के संगम से इस वर्ष नकल के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और अनुशासित वातावरण में संपन्न करवाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बार केवल फ्लाइंग स्क्वॉड की सक्रियता ही नहीं, बल्कि तकनीकी निगरानी और केंद्रों पर कड़े अनुशासन ने नकलचियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। बोर्ड द्वारा बरती गई इस सख्ती का ही परिणाम है कि परीक्षा केंद्रों पर अब अनियमितता की गुंजाइश न के बराबर रह गई है।
केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर एक भावनात्मक अपील भी की है। उन्होंने कहा: "विद्यार्थी जीवन के किसी भी पड़ाव पर अनुचित साधनों या शॉर्टकट्स का सहारा न लें। सच्ची सफलता का आधार केवल आपकी मेहनत, ईमानदारी और आत्मविश्वास है। नैतिकता के मार्ग पर चलकर ही आप एक सुदृढ़ भविष्य की नींव रख सकते हैं।
बोर्ड अध्यक्ष ने पुन: दोहराया कि परीक्षाओं की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। नकल करने वालों के साथ-साथ इसमें संलिप्त अन्य कारकों पर भी बोर्ड की पैनी नजर है। इस बार की गई कड़ी कार्रवाई ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को जनता और अभिभावकों के बीच और अधिक सुदृढ़ किया है।