शिमला। हिमाचल प्रदेश की शिमला पुलिस द्वारा करीब एक करोड़ की लागत की एलएसडी (LSD) की तस्करी मामले में एसटीएफ में कार्यरत 4 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में आरोपी चारों पुलिस कर्मियों की भूमिक संदिग्ध रही है।
आरोपियों ने ट्रैफिकिंग को इंटरसेप्ट करने बावजूद कुछ आरोपियों के साथ मिलकर नशा तस्करी को बढ़ावा दिया। एसटीएफ में कार्यरत चार पुलिस कर्मियों मुख्य आरक्षी राजेश, मुख्य आरक्षी समीर, मानक मुख्य आरक्षी नितेश, आरक्षी अशोक कुमार को 16 मार्च को शिमला पुलिस की विस्तृत जांच के आधार पर एडीजी सीआईडी द्वारा सस्पेंड किया गया था। अब 19 मार्च को चारों आरोपी पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
एएसपी मुख्यालय अभिषेक ने बताया कि 10 मार्च को शिमला पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में LSD की 562 स्ट्रिप्स (लगभग 11.57 ग्राम) बरामद की गई थीं। मामले में संदीप शर्मा जिला मोगा, प्रिया शर्मा, जिला सिरमौर को गिरफ्तार किया था।
बैकवर्ड लिंकेज की जांच के दौरान सप्लायर की पहचान केरला निलासी के रूप में हुई थी। 13 मार्च को पुलिस ने सप्लायर को गुरुग्राम हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि तस्करी की वारदात आरोपी संदीप और नविएल हैरिसन द्वारा कुल्लू जिले में अंजाम दी गई थी।
एसटीएफ में कार्यरत चार पुलिस कर्मी मुख्य आरक्षी राजेश, मुख्य आरक्षी समीर, मानक मुख्य आरक्षी नितेश, आरक्षी अशोक कुमार द्वारा इस ट्रैफिकिंग को इंटरसेप्ट करने के बावजूद कुछ आरोपियों के साथ मिलकर नशा तस्करी को बढ़ावा दिया, जोकि जघन्य अपराध व घोर अनुशानहीनता है। साथ ही आपराधिक षड्यंत्र है। एलएसडी नशा पहले कुल्लू लाया गया। यहां एसटीएफ की टीम ने आरोपियों को पकड़ा, लेकिन केस दर्ज न करके खुद भी नशे की तस्करी में संलिप्त हो गए।
शिमला पुलिस की विस्तृत जांच के बाद एडीजी सीआईडी ने 16 मार्च को चारों को सस्पेंड कर दिया था। तस्करी मामले में चारों आरोपियों की संदिग्ध भूमिका और संलिप्तता को देखते हुए उन्हें शिमला ने19 मार्च को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें कल कोर्ट में पेश किया जाएगा। निलंबित चारों कर्मचारी भी कुल्लू में ही तैनात थे।