देवभूमि की सड़कें, जिन पर हम रोज़ अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं, अब कई परिवारों की खुशियां छीन रही हैं। अखबारों में हर दिन सड़क हादसों की दर्दनाक खबरें छपती हैं, फिर भी हम पूरी तरह सतर्क नहीं हो पा रहे।
हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा हिमाचल प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और ई-DAR की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। वर्ष 2024 में 806 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई, जबकि 2025 में 783 लोगों की मृत्यु हुई। आंकड़ों में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन यह संख्या अब भी बेहद चिंताजनक है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी कहा है कि दुर्घटनाओं और मौतों में कमी आना उत्साहजनक है, लेकिन सड़कों पर एक भी जान जाना दुखद है। सरकार सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आने वाले समय में और सख्त कदम उठाने की बात कर रही है।
अधिकतर दुर्घटनाओं के पीछे तेज रफ्तार, खराब सड़कें, सड़क संकेतों की कमी, आवारा पशु, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और शराब पीकर वाहन चलाना जैसे कारण सामने आते हैं। इसके अलावा नाबालिग युवाओं द्वारा वाहन चलाना भी हादसों की बड़ी वजह बनता जा रहा है। इन लापरवाहियों की कीमत कई परिवार अपनी खुशियां खोकर चुकाते हैं।
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल चेतावनी देना काफी नहीं है। ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन, सड़कों की हालत में सुधार, उचित संकेतों की व्यवस्था और नियमित जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं। दोपहिया वाहन चलाते समय हेल्मेट का उपयोग न करना भी गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनता है। दुर्घटनाओं को कम करने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है।
अभिभावकों को अपने नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने से रोकना चाहिए और युवाओं को भी अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होना होगा। इसके साथ ही सड़क पर अनुशासन बनाए रखना, रात में सही रोशनी और डिपर का उपयोग करना, आवारा पशुओं से सतर्क रहना और सड़क संकेतों का पालन करना आवश्यक है। स्कूल और कॉलेजों में रोड सेफ्टी की शिक्षा, जागरूकता अभियान और मीडिया की सक्रिय भूमिका से भी कई जीवन बचाए जा सकते हैं।
देवभूमि में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए समय रहते कठोर कदम उठाना आवश्यक है, वरना ये हादसे अनगिनत परिवारों के सपनों को यूँ ही तोड़ते रहेंगे। हर दुर्घटना केवल एक खबर नहीं होती, बल्कि किसी परिवार की पूरी दुनिया उजड़ जाती है। यदि अभी भी हम नहीं संभले, तो न जाने कितने घर ऐसे ही बिखरते रहेंगे।
अभिषेक कुमार
(स्वतंत्र लेखक)
ऊना, हिमाचल प्रदेश