पालमपुर दराट हमला : जमीन के लिए बहा खून, कोर्ट में भी चला था मामला
ewn24news choice of himachal 27 Apr,2024 10:08 pm
एक परिवार के चार लोग घायल, दूसरे पक्ष को भी आईं चोटें
पालमपुर। कहा जाता है कि अक्सर झगड़े की जड़ जर, जोरू और जमीन होती है। हिमाचल के कांगड़ा जिला पालमपुर में भी जमीन के लिए खून बहा है। इस दौरान डंडे और दराट चले। दो पक्षों में हुई मारपीट में एक पक्ष के चार लोग घायल हुए हैं। इनमें दो मेडिकल कॉलेज टांडा रेफर किए गए हैं।
दो को पालमपुर अस्पताल में उपचार दिया है। साथ ही दूसरे पक्ष के लोगों को भी सिर पर चोटें आई हैं। एक पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर दूसरे पक्ष से बाप और बेटे को हिरासत में लिया है। दूसरे पक्ष ने भी पुलिस में शिकायत सौंपी है।
बता दें कि दोनों पक्षों में काफी पुराना जमीनी विवाद चल रहा था। मामला कोर्ट में भी पहुंचा था। कोर्ट ने एक पक्ष के हक में फैसला सुनाया था। फैसले से दूसरा पक्ष संतुष्ट नहीं था और दूसरे पक्ष को शिकायत थी। इसी के चलते एक पक्ष रत्न चंद, उनका बेटा मदन लाल भाटिया, बहू संतोष कुमारी और पोते केशव और दूसरे पक्ष हरबंस, उनके बेटे के बीच कहासुनी हो गई।
कहासुनी खूनी संघर्ष में बदल गई। रत्न चंद, उनका बेटा मदन लाल भाटिया, बहू संतोष कुमारी और पोते केशव को घायल अवस्था में पालमपुर अस्पताल लाना पड़ा। दो लोग मेडिकल कॉलेज टांडा रेफर किए गए हैं।
मदन लाल भाटिया द्वारा पुलिस में दी शिकायत में बताया है कि हरबंस और उनके बेटे ने उन पर डंडे और दराट से हमला किया, जिससे वह, उनके पिता, पत्नी और बेटा घायल हो गए। दूसरे पक्ष से हरबंस और उनके बेटे को भी चोट लगी है। उन्होंने भी पुलिस थाना पालमपुर में शिकायत दी है।
लोगों को एक बात तो समझनी होगी कि जमीन सहित अन्य कोई भी विवाद है, उनको या तो बातचीत करके हल किया जा सकता है या फिर कोर्ट या पुलिस थाना के माध्यम से हल किया जा सकता है।
मारपीट, हमला, लड़ाई झगड़ा इसका हल नहीं है। कई बार व्यक्ति गुस्से में ऐसा कर जाता है कि उसे बाद में पछताना पड़ता है। इसके बाद भी कोई हल नहीं निकलता है। समस्या ज्यों की त्यों ही बनी रहती है। उल्टा व्यक्ति नई परेशानियां मोल ले लेता है। जमीन का टुकड़ा किसी की भी जिंदगी से कीमती नहीं हो सकता है। लोगों को संयम बरतना बहुत जरूरी है।
एएसपी कांगड़ा हितेश लखनपाल ने लोगों से आह्वान किया है कि कानून विवाद को कोर्ट के माध्यम से सुलझाएं या पुलिस से पास आएं। अपने स्तर पर कुछ ऐसा न करें, जिससे बाद में परेशानी उठानी पड़े। उन्होंने कहा कि गुस्से में लोग ऐसा कर तो देते हैं पर बाद में पछताना पड़ता है।