शिमला। हिमाचल प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), मौसम केंद्र शिमला के अनुसार उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू के ऊपर समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय हो गया है। इसके प्रभाव से राज्य में आगामी कुछ दिनों के दौरान बारिश और बर्फबारी का दौर देखने को मिल सकता है।
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक, राज्य के विभिन्न जिलों में आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा।
14 अक्टूबर 2026: राज्य के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या बर्फबारी होने की संभावना है। इस दौरान कांगड़ा, कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर जैसे जिलों में कुछ स्थानों पर आंधी-तूफान, बिजली चमकने और ओलावृष्टि को लेकर चेतावनी (अलर्ट) जारी की गई है।
15 अक्टूबर 2026: राज्य में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या बर्फबारी हो सकती है। इस दिन ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में एक-दो स्थानों पर आंधी-तूफान और बिजली चमकने की संभावना के चलते सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।
16 और 17 अक्टूबर 2026: राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना है, हालांकि इसके बाद के दिनों में मौसम के शुष्क रहने के आसार हैं।
पिछले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बहुत हल्की से हल्की बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान राज्य में सबसे कम न्यूनतम तापमान कुकुमसेरी में 0.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि ऊना में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू के ऊपर समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके तुरंत बाद, अगले 3 से 4 दिनों के भीतर न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
मौसम विभाग ने आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की संभावना वाले क्षेत्रों के लिए किसानों और आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे पेड़ों के नीचे शरण न लें, सुरक्षित स्थानों पर रहें और फसलों को ओलों से बचाने के लिए ओलावृष्टि से बचाव के जाल (Anti-hail nets) का उपयोग करें।