ऋषि महाजन/नूरपुर। चक्की पुल के नीचे नए पुल के समीप कथित अवैध खनन को लेकर क्षेत्र में सियासी माहौल गर्मा गया है। पूर्व वन मंत्री राकेश पठानिया ने प्रेस वार्ता के दौरान खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह निष्क्रिय करार दिया।
उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामले के बावजूद खनन विभाग ने अब तक रेलवे पुलिस के पास कोई एफआईआर दर्ज नहीं करवाई है, जो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
पठानिया ने आरोप लगाया कि अवैध खनन के चलते रेलवे विभाग भी पुल पर रेल संचालन को लेकर सतर्कता बरत रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि खन्नी क्षेत्र में सैकड़ों टिप्पर खुलेआम अवैध खनन में लगे हुए हैं, लेकिन संबंधित विभाग कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है।
उन्होंने सुलियाली पुल के पिल्लरों के नीचे भी लगातार खनन होने का आरोप लगाया और कहा कि इससे पुल की नींव कमजोर होने का खतरा बढ़ रहा है। पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि पंजाब में माइनिंग लीज न होने के बावजूद चक्की से सटे क्षेत्रों से हिमाचल का खनिज अवैध रूप से पंजाब के क्रेशरों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने इसे “काला सोना” बताते हुए कहा कि इस पर प्रभावी रोक लगाने में विभाग पूरी तरह विफल रहा है।
पठानिया ने चेतावनी दी कि अवैध खनन के कारण चक्की क्षेत्र में आईपीएच विभाग की पेयजल योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और कई योजनाएं बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। उन्होंने कहा कि खनन पर कार्रवाई का अधिकार 32 विभागों के पास होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई भी विभाग सक्रिय नजर नहीं आ रहा, जो गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने प्रशासन और खनन विभाग को चेताते हुए कहा कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो चक्की रेलवे पुल एक बार फिर खतरे में पड़ सकता है और सुलियाली पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी बढ़ जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित नुकसान की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।