शिमला। देश में आगामी त्योहारों (दशहरा, दिवाली) से ठीक पहले चीनी की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल आया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई और अगस्त के दौरान चीनी के खुदरा और थोक दामों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
खुदरा दाम (Retail Price): जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत लगभग ₹48.18 प्रति किलो थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ₹58 प्रति किलो तक पहुंच गई है। कई स्थानीय बाजारों में यह ₹60 से ₹65 प्रति किलो तक भी बिक रही है।
थोक और एक्स-फैक्ट्री रेट (Wholesale Rate): चीनी मिलों (ex-factory) के रेट ₹4,500 प्रति क्विंटल से बढ़कर ₹5,400–₹5,800 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। यानी थोक बाजार में ही कीमतों में करीब 20 से 30 फीसदी तक की तेजी आई है।
उत्पादन में गिरावट: अत्यधिक बारिश, जलभराव और गन्ने की फसल में बीमारियां (रेड रॉट और टॉप बोरर) लगने के कारण घरेलू चीनी उत्पादन घट गया है। इस सीजन में उत्पादन 343 लाख मीट्रिक टन के अनुमान के मुकाबले गिरकर करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना है।
त्योहारी सीजन की मांग: रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के चलते बाजारों में मीठे पकवानों की मांग अचानक बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर: वैश्विक स्तर पर भी चीनी की सप्लाई तंग होने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 16% तक का उछाल देखा गया है।
जमाखोरी और सट्टेबाजी: सरकार के अनुसार, कुछ व्यापारियों और मिलों द्वारा स्टॉक रोकने (स्टॉकहोल्डिंग) से भी बाजार में कृत्रिम तेजी बनी है।
रसोई के बजट पर सीधा असर: हर घर में चाय, दूध और रोजमर्रा के खान-पान में इस्तेमाल होने वाली चीनी महंगी होने से आम नागरिक के महीने का राशन का बजट बिगड़ जाएगा।
मिठाई और प्रोसेस्ड फूड महंगे होंगे: त्योहारों के मौसम में मिठाइयों, बेकरी प्रोडक्ट्स (केक, बिस्कुट), आइसक्रीम, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैक्ड स्नैक्स की लागत बढ़ेगी, जिससे कंपनियां इनके दाम बढ़ा सकती हैं।
होटल और ढाबा उद्योग पर प्रभाव: चाय की दुकानों, ढाबों और रेस्टोरेंट्स की परिचालन लागत बढ़ेगी, जिसका बोझ अंततः ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।
महंगाई (Inflation) पर दबाव: खाद्य वस्तुओं में तेजी के कारण कुल खुदरा महंगाई दर पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने चीनी व्यापारियों और डीलरों पर स्टॉक लिमिट (स्टॉक सीमा) तय कर दी है। साथ ही, कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं और आवश्यकता पड़ने पर आयात व अतिरिक्त कोटा बाजार में जारी करने की तैयारी की जा रही है।